द फॉलोअप डेस्क
रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय हैंडलूम एवं सरस मेला में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक ने विशेष रूप से शिरकत की। इस अवसर पर झारक्राफ्ट की प्रबंध निदेशक गरिमा सिंह ने पुष्पगुच्छ देकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मेले में लगाए गए विभिन्न लाइव डेमोंस्ट्रेशन सेक्शन का अवलोकन किया। यहाँ उन्होंने बड़े उत्साह के साथ देखा कि किस प्रकार रेशम के कोकून (Cocoon) से धागा तैयार किया जाता है और फिर उसे रीलिंग (Reeling) और बुनाई (Weaving) की पारंपरिक प्रक्रिया से खूबसूरत वस्त्रों में बदला जाता है। कारीगरों द्वारा किए जा रहे इस पारंपरिक कौशल को देखकर वे काफी प्रभावित हुए।
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इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं भी कारीगरों के साथ हैंड पेंटिंग और ब्लॉक प्रिंटिंग की गतिविधियों में भाग लिया। उनके इस सहभागिता से वहाँ मौजूद कारीगरों और आगंतुकों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कारीगरों से बातचीत कर उनके काम की सराहना की और उन्हें अपने पारंपरिक हस्तशिल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुख्य न्यायाधीश ने मेले में लगे विभिन्न हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट स्टॉल्स का भी भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने झारखंड के पारंपरिक उत्पादों, जैसे कि तसर सिल्क, हस्तनिर्मित कपड़े और कलात्मक हस्तशिल्प में गहरी रुचि दिखाई तथा कुछ उत्पादों की खरीदारी भी की।

उन्होंने कहा कि ऐसे मेले न केवल स्थानीय कारीगरों को रोजगार और पहचान दिलाने का मंच प्रदान करते हैं, बल्कि राज्य की समृद्ध हस्तकरघा और हस्तशिल्प परंपरा को देश-दुनिया तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुँचे और झारखंड की पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प का आनंद लिया। यह आयोजन कारीगरों के लिए अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और खरीदारों से सीधे जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो रहा है।
