गुमला:
झारखंड में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने और बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के सरकार के दावों के बीच गुमला से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय तुकुटोली में न पर्याप्त शिक्षक हैं, न पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे और न ही बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था। स्कूल परिसर का चापाकल लंबे समय से खराब पड़ा है, जिसके कारण बच्चों और मध्यान भोजन बनाने वाली कर्मी को दूर से पानी लाना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि पानी के अभाव में स्कूल का शौचालय भी उपयोग में नहीं आ रहा और बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। वहीं, पिछले चार महीने से मध्यान भोजन संचालन की राशि नहीं मिलने के बावजूद शिक्षक उधार और अपनी व्यवस्था से बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।

एक से पांचवीं तक की पढ़ाई, शिक्षक महज दो
उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय तुकुटोली में कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। लेकिन इन पांच कक्षाओं के लिए स्कूल में महज दो कमरे और दो शिक्षक हैं। स्कूल में मौजूद शिक्षक शुक्रू कुजूर और हेमरिटा बेकमान अपनी ओर से बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। शिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्कूल को बेहतर तरीके से संचालित करने की कोशिश की जाती है। लेकिन शिक्षकों की कमी और भवन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। एक साथ अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को संभालना और पढ़ाना शिक्षकों के लिए भी मुश्किल हो जाता है।
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चार महीने से मध्यान भोजन की राशि का इंतजार
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्यान भोजन की व्यवस्था भी मुश्किलों के बीच संचालित हो रही है। बताया गया कि करीब चार महीने से मध्यान भोजन के संचालन के लिए मिलने वाली राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके बावजूद बच्चों का भोजन बंद न हो, इसे देखते हुए शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षकों द्वारा अपनी ओर से पैसे की व्यवस्था करने या उधार लेकर मध्यान भोजन का संचालन कराया जा रहा है। मध्यान भोजन का उद्देश्य बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, लेकिन राशि के अभाव में व्यवस्था चलाना स्कूल प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
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खराब चापाकल के कारण दूर से लाना पड़ता है पानी
स्कूल की सबसे बड़ी समस्याओं में पानी का संकट भी शामिल है। परिसर में लगा चापाकल लंबे समय से खराब पड़ा है। इसके कारण मध्यान भोजन बनाने वाली मनीषा कुमारी को दूर से पानी लाना पड़ता है। वह पानी लेकर स्कूल पहुंचती हैं और उसी पानी से बच्चों के लिए मध्यान भोजन तैयार किया जाता है। यही पानी बच्चों के पीने के लिए भी इस्तेमाल होता है। पानी जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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पानी नहीं तो शौचालय भी बेकार, खुले में जाने को मजबूर बच्चे
स्कूल परिसर में पानी की व्यवस्था नहीं होने का असर शौचालय पर भी पड़ रहा है। पानी के अभाव में शौचालय का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति स्वास्थ्य और स्वच्छता दोनों के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। सरकार की ओर से स्कूलों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने के साथ-साथ स्वच्छता और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, लेकिन तुकुटोली स्कूल की जमीनी स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है।
शिक्षकों के सामने संसाधनों की कमी बड़ी चुनौती
विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन स्कूल में उपलब्ध सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। शिक्षकों की संख्या कम होने के कारण पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल की दूसरी व्यवस्थाओं को संभालना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरकारी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का यह हाल है, तो दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की स्थिति क्या होगी।