गढ़वा
गढ़वा जिले से घोर लापरवाही पर पर्दा डालने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। दरअसल, यह घटना इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि प्रशासनिक सख्ती और कार्रवाई के डर से लापरवाही को छिपाने की कैसी कोशिशें की जाती हैं। गढ़वा जिले के बड़गढ़ स्थित झारखंड ग्रामीण बैंक की भारी लापरवाही के कारण 75 वर्षीय बुजुर्ग रतन लकड़ा को उनकी वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल सकी। पेंशन न मिलने के कारण सही समय पर इलाज न हो पाने से उनकी मौत हो गई। इस संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया।जिसके बाद प्रशासन हरकत में या गई। आइए जानते है पूरा मामला।
आदरणीय सर,
— DC GARHWA (@dc_garhwa) July 7, 2026
मामला संज्ञान में आते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम रंका एवं एलडीएम को शीघ्र विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांचोपरांत दोषी पाए जाने वाले सभी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जायेगी। नियमानुसार रतन लकड़ा के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आप सोच रहे होंगे की घर में क्या कर रहा था बैंक मैनेजर?
दरअसल, यह वही बैंक मैनेजर है जिसने रतन को उनके जीवित रहते अपने ही खाते से पेंशन की रकम निकालने के लिए तीन महीने तक दौड़ाया था। आज उसी मृतक आदिवासी बुजुर्ग, रतन लकड़ा के घर यह बैंक मैनेजर रात के अंधेरे में पहुंचा और मामले को रफ़ा-दफ़ा करने की कोशिश करने लगा। ग्रामीणों के पहुंचने से पहले बैंककर्मियों ने परिजनों को डरा-धमकाकर घर की लाइट बंद करवा दी थी, ताकि अंधेरे में बात दबाई जा सके। लेकिन ठीक उसी समय ग्रामीण वहां पहुंच गए। रंगे हाथों पकड़े जाने पर ये लोग बिना कुछ बोले निकलने लगे, जिसके बाद ग्रामीणों ने उनका पीछा किया। इन बैंककर्मियों में से एक 'ग्रामीण बैंक' के मैनेजर कृष्णा राम थे और दूसरा बैंक कर्मचारी नंदलाल था। जब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, तो बैंककर्मी उल्टे पांव भागने की कोशिश करने लगे। फिर ग्रामीणों ने दोनों बैंक कर्मियों से सवाल किया कि "आप इतनी रात को विधवा के घर क्यों आए हैं?", तो बैंककर्मियों की बोलती बंद हो गई।
मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद प्रशासनिक हलचल
इधर दिन मे मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम-एलडीएम ने बैंक पहुंच कर जांच शुरू की। पेंशन का रकम नहीं मिलने से वृद्ध की मौत के मामले में परिजनों ने बैंक प्रबंधक व कर्मी पर कई गंभीर आरोप लगाए है। जांच के दौरान रिश्वत मांगने की भी परिजनों ने शिकायत की है। गौरतलब है की बड़गड़ प्रखंड के महुआटीकर गांव के 75 वर्षीय वृद्ध पेंशनधारी रतन लकड़ा की मौत के बाद उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों, ग्रामीणों, बैंक कर्मियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अलग-अलग पूछताछ कर घटनाक्रम की बारीकी से जानकारी ली।
परिजनों के बयान और बैंक कर्मियों पर आरोप
जांच के दौरान एसडीएम ने मृतक की पत्नी रेपा लकड़ा, पुत्र अनिल लकड़ा एवं पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा का बयान दर्ज किया। परिजनों ने अधिकारियों को बताया कि रतन लकड़ा कई महीनों से गंभीर रूप से बीमार थे और वृद्धावस्था पेंशन से ही उनके इलाज का प्रमुख सहारा थी। बैंक में कई बार जाने के बावजूद केवाईसी अपडेट नहीं होने का हवाला देकर भुगतान रोक दिया गया। बीमारी के कारण वह बैंक की दूसरी मंजिल तक नहीं जा सकते थे। 
शाखा प्रबंधक और मैसेंजर के दुर्व्यवहार का दावा
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार बैंक कर्मियों से नीचे आकर बायोमेट्रिक सत्यापन करने का अनुरोध किया, लेकिन किसी ने मानवीय संवेदना नहीं दिखाई। पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा ने अधिकारियों को बताया कि जब उन्होंने शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार से अपने ससुर की गंभीर स्थिति बताते हुए मानवीय आधार पर सहायता की अपील की, तब उन्होंने कथित रूप से बैंक के मैसेंजर नंदलाल राम उर्फ हेमंत कुमार से कहा, "इसे बाहर निकाल दो।" इस व्यवहार से आहत होकर वह रोते हुए बैंक से लौट गईं।.jpeg)
बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद भी नहीं मिली पेंशन
परिजनों ने यह भी बताया कि बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद बैंक कर्मी उनके घर पहुंचे और बिस्तर पर ही अंगूठे का निशान लेकर केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बावजूद खाते से पेंशन की राशि नहीं निकल पाये। उनका आरोप है कि यदि समय पर पेंशन मिल जाती तो इलाज बेहतर ढंग से हो सकता था और संभवतः रतन लकड़ा की जान बचाई जा सकती थी। जांच करने पहुंचे एसडीएम और एलडीएम ने कहा की घटना बहुत दुःखद है दोषी पाए जाने पर कठोर कार्यवाई होगी ऐसा नहीं होना चाहिए था। हमलोग इसकी रिपोर्ट अपने अधिकारियो को देंगे।