द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में पेशा कानून एक्ट लागू होने के बावजूद अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को गैर-अनुसूचित गाँव में बसाए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल के विश्रामपुर पंचायत के बरवहा टोला में भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर विरोध जताया। कूटकू मंडल डैम के विस्थापितों को रंका के बरवहा टोला के एक हजार एकड़ भूमि पर बसाने की योजना है। जिला प्रशासन ने 780 परिवारों के लिए यह भूमि चिन्हित की थी। पहले यह विवाद सिर्फ प्रशासन और ग्रामीणों के बीच था, लेकिन अब भाजपा विधायक के समर्थन के बाद स्थानीय ग्रामीणों को और भी बल मिल गया है। बीते 7 मार्च को इसी जमीन पर जिला प्रशासन और ग्रामीणों की झड़प हुई थी, जिसमें पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। स्थानीय ग्रामीण इस घटना से गहरे आहत में हैं। राजेंद्र बड़ाइक और सुरेश उरांव ने विधायक को अपनी समस्याएं बताईं और कहा कि किसी भी कीमत पर विस्थापितों को गाँव में नहीं बसने देंगे।

वहीं विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि झारखंड में पेशा कानून एक्ट लागू है, तो फिर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को गैर-अनुसूचित गाँव में क्यों बसाया जा रहा है, इसका स्पष्ट जवाब जिला प्रशासन को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना ग्राम सभा के 780 परिवारों को वन भूमि में बसाने की योजना उचित नहीं है। 7 मार्च को डीसी, एसपी और वरीय अधिकारियों के पर निर्दोष ग्रामीणों की पिटाई हुई थी, जो बर्दाश्त के बाहर है। विधायक ने आगे कहा कि यदि जिला और केंद्र स्तर पर इस मुद्दे का समाधान नहीं निकला, तो स्थानीय ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिटाई के बाद घायल ग्रामीणों का इलाज प्रशासन द्वारा नहीं कराया गया, जिससे उन्हें निजी खर्च पर इलाज कराना पड़ा। वहीं बरवहा टोला में स्थानीय ग्रामीणों ने विधायक का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। मंच पर उन्हें पलाश के फूलों का बुके और सखुवा के पत्तों से बनी टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़े हैं और विस्थापितों को गाँव में बसाने के प्रयास का विरोध करेंगे।
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