द फॉलोअप डेस्क, गढ़वा:
Garhwa Kharaundhi Health System Collapse : गढ़वा के खरौंधी प्रखंड में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2007 में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से स्वास्थ्य उपकेंद्र का भवन बनाया गया था। करीब दो दशक गुजरने के बाद भी यहां नियमित रूप से मरीजों का इलाज शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, लंबे समय से बंद पड़े इस भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही है। भवन परिसर में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों के जमावड़े का भी दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन में रखे कुछ सामान भी गायब हो चुके हैं।

करोड़ों की इमारत, लेकिन स्वास्थ्य सेवा नहीं
झारखंड-उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे खरौंधी में वर्ष 2007 में तत्कालीन मधु कोड़ा सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य उपकेंद्र के भवन का निर्माण कराया गया था। उद्देश्य था कि प्रखंड के ग्रामीणों को उनके इलाके में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। भवन तैयार होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उन्हें इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण के बाद से आज तक यहां स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से शुरू नहीं हो सकीं। नतीजा यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सरकारी इमारत अब धीरे-धीरे जर्जर हो रही है, जबकि ग्रामीणों को इलाज के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।
.jpeg)
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल शुरू होने से इलाके के हजारों लोगों को फायदा मिल सकता था। लेकिन भवन के इस्तेमाल में नहीं आने से आज भी ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है। गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रांची और वाराणसी जैसे शहरों तक ले जाने की स्थिति बनती है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। राजेंद्र प्रसाद, गोरखनाथ चौधरी और खरौंधी की प्रखंड प्रमुख आभा रानी ने भी भवन और स्वास्थ्य सुविधा को लेकर सवाल उठाए हैं।

स्वास्थ्य विभाग का दावा- भवन हैंडओवर ही नहीं हुआ
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल भवन के इस्तेमाल को लेकर है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, भवन का निर्माण स्वास्थ्य विभाग के लिए किया गया था, लेकिन इसे विभाग को औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं किया गया। गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कनेडी के मुताबिक, भवन के हैंडओवर की स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। करीब 19 साल से उपयोग में नहीं आने के कारण भवन की स्थिति खराब होती जा रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के संरक्षण का भी है। जनता के पैसे से तैयार इस भवन का उपयोग अगर समय पर शुरू हो जाता, तो क्षेत्र के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती थी और सरकारी संपत्ति भी सुरक्षित रहती।