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LPG सब्सिडी के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पकड़ा गया 1 शातिर

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जामताड़ा:

​जामताड़ा पुलिस ने एलपीजी की सब्सिडी के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस केस में 19 वर्षीय विश्वजीत सरदार को गिरफ्तार किया है। आरोपी विश्वजीत सरदार जामताड़ा के बागडेहरी थानाक्षेत्र अंतर्गत सुद्राक्षीपुर का रहने वाला है। यह कार्रवाई जामताड़ा एसपी शंभू कुमार सिंह को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। एसपी ने मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेकर साइबर डीएसपी अमित कुमार के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया जिसमें थाना प्रभारी राजेश मंडल और पुलिस निरीक्षक प्रशांत कुमार के साथ रिजर्व गार्ड के चुनिंदा जवानों को शामिल किया गया था।

टीम ने सुद्राक्षीपुर में विश्वजीत सरदार के मकान की घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इसके अलावा बागडेहरी से 2 किमी दूर बागडेहरी-मुड़ाबेड़िया ग्रामीण पक्की सड़क पर बने पुल के पास भी सघन छापेमारी अभियान चलाया। 

एलपीजी सब्सिडी खत्म होने का देते थे झांसा
इस केस के संबंध में साइबर थाने में कांड संख्या 42/2026 के तहत आरोपी विश्वजीत सरदार के खिलाफ बीएनए, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और नए टेलिकम्युनिकेशन एक्ट-2023 की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस छानबीन में जुटी है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि विश्वजीत सरदार अकेले ऑनलाइन ठगी की वारदातों को अंजाम देता था, या इस कांड में उसके साथ अन्य लोग भी शामिल हैं। दरअसल, इस केस में देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को एलपीजी सब्सिडी खत्म होने और उसे दोबारा बहाल करने का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया गया है। 

पुलिस ने विश्वजीत सरदार के पास से विभिन्न कंपनियों के 6 स्मार्टफोन, 7 सिमकार्ड और 1 आधार कार्ड बरामद किया है। 

विभिन्न राज्यों में लोगों को बनाया था शिकार
पूछताछ में पता चला है कि गिरोह के अपराधी विभिन्न राज्यों में लोगों को रैंडम कॉल करके डराते थे कि उनके एलपीजी कनेक्शन में सरकारी सब्सिडी तकनीकी कारणों से बंद हो गई है। इसके बाद शिकार को सब्सिडी दोबारा शुरू करने का झांसा दिया जाता था। जब, सामने वाला व्यक्ति सब्सिडी चालू कराने की बात मान जाता तो ये शातिर अपराधी उसकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी जैसे ओटीपी, सीवीवी या नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स हासिल कर लेते थे। जैसे ही ये जानकारियां मिलती, वे पीड़ित के खाते से पैसा उड़ा लेते थे। 

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