द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
भाजपा ने 23 सितंबर को बड़े पैमाने पर सांगठनिक फेरबदल किया है। देश के सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में नये प्रदेश प्रभारियों को जिम्मेदारी दी गयी है। यह अनायास नहीं है। इसके दो स्पष्ट संकेत हैं। यह फेरबदल यूपी, पंजाब और अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव के साथ साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की भी तैयारी है। इसके अलावा बड़े नेताओं को सांगठनिक जिम्मेदारी दिए जाने के बाद यह भी साफ हो रहा है कि अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर जारी विवाद और उठा पटक को भाजपा ने बहुत हद तक सुलझा लिया है। मंत्रिमंडल में बदलाव जल्द मूर्त रूप लेगा। झारखंड जैसे छोटे राज्य को प्रदेश प्रभारी के अलावा दो सह प्रभारी भी दिया गया है। इसका मतलब साफ है कि पार्टी का झारखंड पर विशेष नजर हैं। झारखंड के दो नेताओं को सह प्रभारी बनाना भी राज्य के महत्व को दर्शाता है। झारखंड से सांसद प्रदीप वर्मा और राजमहल के पूर्व विधायक अनंत ओझा उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के प्रभारी बनाये गए हैं। मालूम हो कि यूपी में अगले साल विधानसभा उप चुनाव की दुंदुभि बजने वाली है। लेकिन अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन सरीखे पूर्व मुख्यमंत्रियों को कहीं की जिम्मेदारी नहीं दी गयी।
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झारखंड में गजेंद्र पटेल नये प्रदेश प्रभारी बने हैं। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री भी हैं। गजेंद्र सिंह पटेल अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आते हैं। वे मध्य प्रदेश की खरगोन (ST) लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं। बताने की जरुरत नहीं कि झारखंड में जनजातीय समुदाय की बहुलता है। संभवतः पार्टी ने झारखंड के एसटी समुदाय को ध्यान में रख कर पटेल को प्रभारी बनाया है। जबकि सौरभ सिंह छत्तीसगढ़ के हैं और अकलतारा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रहे हैं। वे उच्च जाति से आते हैं। निवेदिता सिंह बिहार विधान परिषद की सदस्य हैं। वह राजपूत जाति से आती हैं। इस लिहाज से झारखंड के उच्च जाति के मतदाताओं को भी निश्चित रूप से साधने की कोशिश दिखती है। यह अलग बात है कि प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी के जातीय समीकरण का संगठन पर सीधा असर नहीं पड़ता है, लेकिन उस समाज से जुड़े मतदाताओं में एक सकारात्मक संदेश जाता है।

झारखंड के तीनों प्रभारी पड़ोसी राज्यों से
झारखंड प्रदेश भाजपा के तीनों प्रभारी पड़ोसी राज्यों से है। संभव है कि इन्हें झारखंड की बेहतर भौगोलिक और सामाजिक स्थिति की जानकारी होने की वजह से यह जिम्मेदारी दी गयी हो। गजेंद्र पटेल मध्य प्रदेश से हैं जिसकी सीमा रेखा झारखंड से सीधी नहीं जुड़ती है। लेकिन मध्य प्रदेश झारखंड के नजदीकी राज्यों में है। उसी तरह निवेदिता सिंह बिहार से हैं, जिससे अलग होकर नये झारखंड का निर्माण ही हुआ है। सौरभ सिंह छत्तीसगढ़ से आते हैं। छत्तीसगढ़ से झारखंड की न सिर्फ सीमा लगती है, बल्कि सामाजिक और भौगोलिक समानता भी है।
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