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हजारीबाग में पत्रकार पर हमले को लेकर BJP नेताओं का मंत्री इरफान पर हमला, बाबूलाल बोले- वह खुद को लोकतंत्र से ऊपर समझने लगे हैं

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रांची
हजारीबाग में पत्रकार से हुए मारपीट मामले में भाजपा नेताओं ने स्वस्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी को घेरना शुरू कर दिया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "हजारीबाग में सवाल पूछने पर नाराज स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के इशारे पर उनके एक दर्जन समर्थकों द्वारा News 18 Jharkhand के पत्रकार सुशांत सोनी के साथ मारपीट किए जाने की चिंताजनक सूचना मिली है. लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकारों का अधिकार है, लेकिन वंशवाद के सहारे राजनीति करने वाले इरफान अंसारी जैसे लोग खुद को लोकतंत्र से ऊपर समझने लगते हैं और जनता को तुच्छ मानते हैं. उनके द्वारा आए दिन आम जनता और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं. सीएम हेमंत सोरेन जी, यदि आपके मंत्री को जनता के सवाल चुभ रहे हैं, तो उन्हें सलाह दें कि राजनीति छोड़कर घर बैठ जाएं. पत्रकारों के साथ मारपीट को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने हजारीबाग डीसी से घायल पत्रकार के इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा है."
 

वहीं हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल एन अपने फेसबुक हैंडल पर भी इसे लेकर पोस्ट किया है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी आज हजारीबाग आए थे. सवालों का जवाब देने के बजाय अपने प्रतिनिधियों से पत्रकारों पर हमला करवाना बेहद शर्मनाक है. लगता है मंत्री जी स्वास्थ्य विभाग नहीं, गुंडा विभाग संभाल रहे हैं. प्रश्नों से इतनी घबराहट क्यों? पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र पर हमला है. दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो."
 

हजारीबाग सदर के विधायक प्रदीप प्रसाद ने भी इस मामले को लेकर स्वस्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी पर निशाना साधा है. उन्होंने अपने फेसबुक हैंडल पर पोस्ट किया. अपने पोस्ट पर उन्होंने लिखा, "इरफान अंसारी अब मंत्री कम और माफिया डॉन ज्यादा नजर आने लगे हैं. मंत्री से सवाल पूछना लोकतंत्र में पत्रकारों का अधिकार है, लेकिन जब सवाल पूछने पर ही पत्रकार की पिटाई कर दी जाए, तो यह बेहद चिंताजनक और निंदनीय है. आरोप है कि इरफान अंसारी से सवाल पूछने पर उनके समर्थकों द्वारा पत्रकार के साथ मारपीट की गई. यह घटना झारखंड में प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाली है. लोकतंत्र में मीडिया चौथा स्तंभ माना जाता है. यदि पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेंगे और उन्हें सवाल पूछने की सज़ा मिलेगी, तो यह पूरी व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है. मंत्री पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति से अपेक्षा होती है कि वे कानून और संविधान का सम्मान करें, न कि अपने पद का दुरुपयोग होने दें. मैं इस प्रकार की गुंडई की कड़ी निंदा करता हूं और सरकार से मांग करता हूं कि दोषियों की शीघ्र पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और पत्रकार निर्भीक होकर अपना कर्तव्य निभा सकें."
 

 

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