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पापा परिमल NDA के समर्थन से राज्यसभा गए, बेटा धनराज INDIA गठबंधन के सपा से जाएंगे

पापा परिमल NDA के समर्थन से राज्यसभा गए, बेटा धनराज INDIA गठबंधन के सपा से जाएंगे

द फॉलोअप टीम, रांची:

National News: सियासत(Poltics) में ऐसा 'फैमिली पैकेज' शायद पहली बार देखने को मिलेगा। एक ही छत के नीचे NDA और "INDIA दोनो रहेंगे। उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों पर अखिलेश यादव ने ऐसा पत्ता खोला कि सियासी गलियारों में चाय ठंडी होने से पहले ही गरम हो गई। सपा ने रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। मालूम है, उनके पिता कौन हैं? परिमल नथवानी, जो झारखंड से एनडीए समर्थित राज्यसभा सांसद हैं। मतलब एक ही छत के नीचे एक तरफ NDA और दूसरी तरफ INDIA. देश में गठबंधन टूटते रहते हैं, यहां तो घर में ही गठबंधन बन गया। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में सपा ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, पर उम्मीदवार तीन ही उतारे हैं। चौथा पत्र शायद "सरप्राइज" नंबर दो के लिए बचाकर रखा गया था। रामगोपाल का जाना तो पहले से तय माना जा रहा था, पर "वाइल्ड कार्ड एंट्री" का मजा ही अलग है, खासकर जब वाइल्ड कार्ड किसी और पार्टी के समर्थक सांसद का बेटा हो।

कौन हैं धनराज नथवानी?

जो लोग पूछ रहे हैं कि "ये कौन हैं?", उनके लिए बायोडाटा हाजिर है। 5 फरवरी 1986 को जन्मे धनराज लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से पढ़े हैं और फिर कॉर्पोरेट लॉ व पब्लिक रिलेशंस में एमबीए कर चुके हैं। पब्लिक रिलेशंस की पढ़ाई का इस्तेमाल अब शायद पार्टी और परिवार, दोनों के रिश्ते संभालने में होगा। रिलायंस में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं, जियो के रोल-आउट से लेकर रिलायंस न्यू एनर्जी तक कई बोर्डों में निदेशक रहे हैं, और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। अहमदाबाद का दुनिया का सबसे बड़ा नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम बनाने-संभालने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। यानी जिस स्टेडियम में नाम "नरेंद्र मोदी" का है, उसके अध्यक्ष अब "अखिलेश यादव" के उम्मीदवार हैं। क्रिकेट में इसे कहते हैं: पिच वही, बल्ला दूसरा!

पिता परिमल नथवानी का सफरनामा

पिता परिमल नथवानी की कहानी भी फिल्मी है। मुंबई में कोल्ड ड्रिंक और साबुन की फैक्ट्री लगाई, 90 के दशक में बडोदरा में करीब 40 पीसीओ चलाए, शेयर बाजार में हाथ आजमाया और भारी नुकसान के बाद तनाव भी झेला। फिर 1997 में धीरूभाई अंबानी से मुलाकात ने जिंदगी बदल दी। जामनगर की जमीन का अधिग्रहण उन्हीं की देखरेख में हुआ, जहां दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी खड़ी है। आज वे रिलायंस में कॉर्पोरेट अफेयर्स के निदेशक हैं और झारखंड से चौथी बार राज्यसभा सांसद। तीन दशक से व्यापार, राजनीति और खेल प्रशासन, तीनों में सक्रिय हैं। ऐसे में बेटे का भी राजनीति में उतरना बनता ही है। बस सवाल यही है कि पिता जिस पाले में खड़े हैं, बेटा ठीक उसके सामने वाले पाले से क्यों।

सवाल जिस पर आम लोग कर रहें हैं चर्चा

जैसे हीं ये आम लोगों के पास खबर पहुंची, हर कोई के मन में कई सवाल हैं। हर कोई अपने तरीके से जबाब भी दे रहा है। सवाल ये हैं कि क्या नथवानी परिवार में अब डिनर टेबल पर "संसद की कार्यवाही" जैसा माहौल रहेगा? क्या पिता-पुत्र राज्यसभा में एक-दूसरे के खिलाफ वोट करेंगे, या "घर की बात घर में ही" निपट जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल: जब राज्यसभा में सत्ता और विपक्ष की बेंच पर एक ही परिवार के दो सदस्य बैठेंगे, तो चाय-ब्रेक में मेज कौन-सी होगी? फिलहाल जितनी मुंह उतनी बात सुनने को मिल रही है। जवाब किसी के पास नहीं है, पर इतना तय है कि सपा का यह दांव सुर्खियों में छा गया है और भाजपा खेमे के रणनीतिकार सिर खुजला रहे होंगे। सियासत में "सरप्राइज" तो बहुत देखे थे, पर "फैमिली सरप्राइज" पहली बार है।

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