द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग जिले के रहने वाले अब्दुल गफ्फार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान विशुनगढ़ प्रखंड में ‘पानी पंचायत’ के माध्यम से तालाबों के गहरीकरण और जीर्णोद्धार का कार्य किया था। उन्होंने बताया कि यह कार्य उन्होंने फरवरी 2023 में 25 दिनों में पूरा किया था। विभाग द्वारा उनके कार्य का कुल 5,98,000 रुपये का बिल पास किया गया था। काम के दौरान उन्हें पहली किस्त के रूप में 1.70 लाख रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन कार्य पूर्ण होने के बाद अब तक शेष 4.28 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। बकाया राशि नहीं मिलने से वे आर्थिक रूप से परेशान हैं और लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। अब्दुल गफ्फार ने 25 नवंबर 2024 को निदेशक (भूमि संरक्षण, झारखंड, रांची) को पत्र लिखकर बकाया राशि जारी करने की मांग की थी। इसके बाद 20 मार्च 2025 को उन्होंने दोबारा पत्र भेजकर भुगतान की मांग दोहराई।
विभाग की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण दिया गया था कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कर्मियों की व्यस्तता के कारण भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि, अब्दुल गफ्फार का कहना है कि चुनाव समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है और दो वर्ष गुजर जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर उन्हें उनका बकाया पैसा कब मिलेगा। सिर्फ अब्दुल गफ्फार ही नहीं, बल्कि उनके जैसे कई अन्य लोगों का भुगतान भी लंबित है। उनके द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, हजारीबाग और रामगढ़ जिले में वित्तीय वर्ष 2022-23 के तहत मृदा एवं जल संरक्षण योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों का भुगतान अब तक शेष है। इन कार्यों में बंजर भूमि विकास, तालाबों का गहरीकरण, जीर्णोद्धार, परकोलेशन टैंक निर्माण और डीप बोरिंग शामिल हैं, जिन्हें ‘पानी पंचायत’ के माध्यम से कराया गया था।
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पत्र में उल्लेख किया गया है कि हजारीबाग जिले में लगभग 89.26 लाख रुपये और रामगढ़ जिले में करीब 135 लाख रुपये की राशि अब भी बकाया है। बकाया देनदारी (लायबिलिटी) की मांग पूर्व में भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक बजट आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है। बजट की अनुपलब्धता के कारण ‘पानी पंचायत’ को उनके द्वारा किए गए कार्यों का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। भुगतान में देरी से स्थानीय लोग और पंचायत प्रतिनिधि लगातार कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं और विरोध जता रहे हैं। विभाग ने उच्च अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 की लंबित राशि को जल्द जारी किया जाए, ताकि संबंधित पानी पंचायतों को उनका बकाया भुगतान मिल सके और भविष्य में जल संरक्षण कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।