द फॉलोअप डेस्क
सामाजिक -आर्थिक एवं संसदीय अध्ययन केंद्र के सचिव अयोध्या नाथ मिश्र ने अबुआ दिशोम बजट को सम्यक विकास के लिए सीमित संसाधन में बेहतर परिणामी बनाने की खींचतान बताया है। उन्होंने कहा है कि 1.58 लाख करोड़ के बजट में कुल मिलाकर राज्य का स्व कर और गैर कर राजस्व से लगभग 67 हजार करोड़ मात्र केन्द्रीय सहायता, केन्द्रांश और बाजार ऋण की मुखापेक्षी बढ़ाता है। राज्य को केन्द्रीय करों की हिस्सेदारी से जहां 51 हजार करोड़ से अधिक की अपेक्षा है, वहीं केन्द्र से सहायता में वृद्धि की कोशिश आवश्यक है।

झारखंड ने विगत कुछ वर्षों से 2030 तक जीएसडीपी 10 लाख किये जाने का सपना देखा है, उसके लिए 15% वार्षिक ग्रोथ अपरिहार्य है। ऐसे में कठोर वित्तीय अनुशासन और आर्थिक- वित्तीय प्रबंधन अपेक्षित होगा। मिश्र ने राज्य में कृषि,एम एस एम ई, उद्योग,देशज उद्यम, ढांचागत विकास और कल्याणकारी सेवा योजनाओं में अधिकाधिक निवेश आउटकम के लिए श्रेयस्कर बताया है। विकास की दौड़ में कृषि,कौशल और रोजगार पीछे छूटेगा तो बजट पर दबाव बढ़ेगा। अत: खेती को केवल इंस्योर्ड नहीं एस्योर्ड बनाने की प्राथमिकता बजट से लक्षित है। उन्होंने राज्य को देश के औसत विकास स्तर तक पहुंचाने के लिए आर्थिक संसाधन अभिवृद्धि की चुनौती के क्रम में कहा कि झारखंड के लिए यह कठिन नहीं है।
