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300 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में चांडिल से कोलकाता तक 20 ठिकानों पर ED का छापा

300 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में चांडिल से कोलकाता तक 20 ठिकानों पर ED का छापा

द फॉलोअप डेस्क, रांची:

Jharkhand News: 300 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड (Bank Fraud in Jharkhand) मामले में झारखंड के चांडिल से लेकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक कुल 20 ठिकानों पर ईडी (ED Raid in Jharkhand) का छापा पड़ा है। ईडी की एक टीम ने सरायकेला-खरसावां (Saraikela-Kharsawan) जिले के चांडिल स्थित खुंचीडीह में कोहिनूर स्टील प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Kohinoor Steel Private Limited) पर छापा मारा। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को यह कार्रवाई हुई है। 300 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में कंपनी के खिलाफ जांच के दायरे में जमशेदपुर और कोलकाता समेत कुल 20 ठिकाने शामिल है। 

66 मेगावाट की क्षमता वाला पावर प्लांट बनना था
गौरतलब है कि चांडिल के खुंचीडीह में 66 मेगावाट की क्षमता वाला थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के लिए कंपनी ने अलग-अलग बैंकों से 900 करोड़ रुपये का लोन लिया था। आरोप है कि लोन में मिली रकम का इस्तेमाल थर्मल पावर प्लांट बनाने की जगह दूसरी कंपनियों में निवेश और निजी इस्तेमाल के लिए किया गया। इसी सिलसिले में शुक्रवार को रांची से ईडी के अधिकारियों की 5 सदस्यीय टीम चांडिल स्थित कोहिनूर स्टील परिसर में दाखिल हुई। अधिकारी करीब 8 घंटे कंपनी कार्यालय में रुके और छानबीन की। कार्रवाई का सिलसिला दोपहर 1 बजे तक चला।  

शेल कंपनियों में राशि डायवर्ट की गई
कंपनी प्रबंधन पर आरोप है कि लोन में मिली राशि का इस्तेमाल पावर प्लांट बनाने में करने की जगह, सुनियोजित  साजिश के तहत इसे अलग-अलग 100 शेल कंपनियों के खातों में डायवर्ट किया गया। इस राशि का इस्तेमाल प्रमोटरों ने निजी संपत्ति खरीदने और व्यक्तिगत विलासिता यानी घूमने-फिरने और पसंद की चीजें खरीदने में किया। 

2005 में झारखंड सरकार से हुआ था MoU
गौरतलब है कि कोहिनूर स्टील प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2006 में झारखंड सरकार के साथ एमओयू साइन किया था। इस समझौते के तहत स्पंज आयरन, टीएमटी बार और पावर प्लांट की स्थापना की जानी थी। चांडिल-खुंचीडीह में जमीन लेकर बकायदा इंफ्रास्ट्रक्चर भी खड़ा किया गया, लेकिन महज दिखावे के लिए। इस ढांचे के आधार पर कंपनी ने 2008 से लेकर 2013 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा की अगुवाई वाली कंसोर्टियम से 290 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट सुविधा मंजूर करा ली। हालांकि, कई बार परियोजना की मियाद बढ़ाने के बावजूद वर्ष 2016 तक प्लांट का काम नहीं हुआ। हालांकि, इससे पहले वर्ष 2015 में ही बैंकों ने  खाते को एनपीए घोषित कर दिया। 

कंपनी ने बैंकों को ऐसे लगाया था चूना
जांच में यह सामने आया कि कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंकों के साथ धोखाधड़ी की। कंपनी के प्रमोटर विजय बोथरा और प्रशांत बोथरा समेत अन्य लोगों ने परिजनों के नाम पर कोलकाता और आसपास के शहरों में संपत्तियां खरीदी। इन संपत्तियों से आरोपियों को 26 लाख रुपये सालाना किराया मिल रहा था। 2018 में जब एनसीएलटी को दिवालिया घोषित करने का प्रक्रिया शुरू हुई और 2019 में लिक्विडेशन से केवल 7 करोड़ रुपये मिले तो काफी नुकसान हुआ। 
 

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