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दूधमटिया पर्यावरण मेला 30 सालों से दे रहा पेड़ों की रक्षा का संदेश, अन्य राज्यों में भी फैल रही परंपरा

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*हजारीबाग: *

द फॉलोअप डेस्क
सेवानिवृत्त शिक्षक महादेव महतो की पहल आज बड़े स्तर पर असर दिखा रही है। उनके प्रयासों से 6 राज्यों में वन महोत्सव का आयोजन हो रहा है, और कई स्थानों पर उनकी सोच के आधार पर वृक्ष रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि अब आम लोग वृक्षों की रक्षा करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

महादेव महतो ने 1999 में हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड के दूधमटिया जंगल से वन महोत्सव की शुरुआत की थी। उनका मानना था कि वृक्षों में ही संसार बसता है, और इस उद्देश्य से उन्होंने अपने क्षेत्र में पेड़ की अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिए अभियान चलाया। इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए गीतों का सहारा लिया गया, साथ ही गांव के लोग वृक्षों का रक्षाबंधन करते थे और यह कसम खाते थे कि वे इन पेड़ों की रक्षा करेंगे।
महादेव महतो की पहल अब 6 राज्यों में फैल चुकी है और वन महोत्सव के दौरान रक्षाबंधन का यह कार्यक्रम व्यापक रूप से मनाया जाता है। विशेष रूप से, 7 अक्टूबर को टाटीझरिया के दूधमटिया जंगल में हर साल वन महोत्सव का आयोजन होता है, जहां सबसे पहले वन देवी की पूजा की जाती है और फिर रक्षाबंधन का कार्यक्रम शुरू होता है।

महादेव महतो ने इस अभियान को पूजा से भी जोड़ा और बताया कि वन देवी ही जंगल की रक्षा करती हैं। इसके बाद, स्थानीय लोग वन देवी की पूजा करते हुए जंगल की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। उनकी इस पहल का असर यह हुआ कि पहले जहां लकड़ी तस्करों का दबदबा था, वहां अब तस्कर भागने को मजबूर हो गए हैं। आज दूधमटिया जंगल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध है, और यहां दूर-दराज से पर्यावरण प्रेमी इस परंपरा को समझने के लिए आते हैं।
दूधमटिया वन महोत्सव का आयोजन वन समिति, वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से होता है। महोत्सव के दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें झारखंड सरकार के वन विभाग द्वारा पर्यावरण और वृक्षों की सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने वाले स्टॉल भी लगाए जाते हैं। महादेव महतो और उनके साथियों की इस पहल ने कई जंगलों को उजड़ने से बचाया है और दूधमटिया वन महोत्सव आज कई अन्य वन महोत्सवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। महादेव महतो की यह पहल समाज के हर व्यक्ति से अपील करती है कि वे वृक्षों की सुरक्षा में अपना योगदान दें और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करें।



 

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