नंदलाल तुरी
पाकुड़ जिले के आमडापाड़ा स्थित पचवारा नॉर्थ कोल ब्लॉक से विस्थापित हुए ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय में आयोजित जनता दरबार में पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को लिखित मांग पत्र सौंपते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, रोजगार सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। पचवारा नॉर्थ कोल ब्लॉक की अनुश्रवण एवं नियंत्रण समिति द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में कहा गया है कि परियोजना से विस्थापित ग्रामीणों के साथ डब्ल्यूपीडीसीएल (WPDCL) पिछले सात वर्षों से शोषण कर रही है। कंपनी के सौतेले व्यवहार के कारण विस्थापित परिवारों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कंपनी द्वारा केवल आश्वासन दिए गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापन के बाद अब तक स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिशनपुर मौजा के समतलीकरण और रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मांग पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वे बाध्य होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल महातन टुडू और अद्रीयस मुर्मू ने उपायुक्त के समक्ष विस्थापितों की पीड़ा रखी। उपायुक्त ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। जनता दरबार में शामिल विस्थापित ग्रामीणों में शिवधन हेंब्रम, सहेबजान मरांडी, वकील बेसरा, प्रधान टुडू, रसका किस्कू सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि अमरपाड़ा प्रखंड अंतर्गत पचवारा नॉर्थ कोल ब्लॉक के लिए करीब सात वर्ष पूर्व बिशनपुर मौजा के ग्रामीणों को विस्थापित किया गया था। आज भी वे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद जब कोल प्रबंधन द्वारा कोई पहल नहीं की गई, तो मजबूर होकर विस्थापितों ने उपायुक्त से न्याय की गुहार लगाई है।
