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रानी हॉस्पिटल की टीम ने बचाई 28 सप्ताह में जन्मे शिशु की जान

रानी हॉस्पिटल की टीम ने बचाई 28 सप्ताह में जन्मे शिशु की जान

द फॉलोअप डेस्क, रांची: 

Jharkhand News: राजधानी रांची स्थित रानी हॉस्पिटल (225 बेड का टर्शियरी केयर सुपरस्पेशियलिटी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल) ने एक अत्यंत दुर्लभ एवं जटिल समस्या में सफल उपचार कर महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल की है। जन्म के समय मात्र 730 ग्राम वजन वाले अत्यंत समयपूर्व जन्मे शिशु की जीवनरक्षक जटिल सर्जरी जन्म के दूसरे ही दिन की गई। इसके बाद डॉ. राजेश कुमार, डॉ. किरण एवं डॉ शुभा एवं उनकी टीम की चौबीसों घंटे निगरानी और गहन चिकित्सा के फलस्वरूप 126 दिनों के लंबे उपचार के बाद अब शिशु को अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। यह शिशु जुड़वां बच्चों में से एक था, जिसका जन्म रांची स्थित लक्ष्मी नर्सिंग होम में गर्भावस्था के मात्र 28 सप्ताह में हुआ था। मां में समय से पहले पानी की थैली फटने (Premature Rupture of Membranes) के कारण बच्चों का जन्म अत्यंत समयपूर्व हुआ। जन्म के समय शिशु का वजन मात्र 730 ग्राम था। जांच में शिशु में भोजन नली का जन्मजात अवरोध एवं भोजन नली और श्वसन नली के बीच असामान्य संपर्क (Esophageal Atresia with Tracheoesophageal Fistula) जैसी गंभीर जन्मजात विकृति पाई गई।

माता-पिता ने रानी हॉस्पिटल पर विश्वास बनाए रखा

इस स्थिति में भोजन नली की सामान्य निरंतरता बाधित रहती है और भोजन नली एवं श्वसन मार्ग के बीच असामान्य संपर्क हो सकता है। शिशु के अत्यंत समयपूर्व जन्म और बहुत कम वजन के बावजूद तत्काल सर्जरी आवश्यक थी। जन्म के दूसरे ही दिन पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. मो. इमरान द्वारा शिशु की जीवनरक्षक सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद शिशु की नियोनेटल एवं पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल डॉ. राजेश कुमार, डॉ. किरण एवं डॉ शुभा के नेतृत्व में बहुविषयक चिकित्सकीय टीम द्वारा की गई। इस टीम में पीडियाट्रिक सर्जन, नियोनेटोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, इंटेंसिविस्ट, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ एवं NICU के अन्य सदस्य शामिल रहे। शुरुआत से ही माता-पिता को शिशु की अत्यंत गंभीर स्थिति, बहुत कम जन्म वजन, समय से काफी पहले जन्म, गंभीर जन्मजात विकृति तथा जीवन के शुरुआती दिनों में बड़ी सर्जरी से जुड़े जोखिमों और उपचार के अनिश्चित परिणाम के बारे में विस्तार से समझाया गया था। तमाम चुनौतियों के बावजूद माता-पिता ने रानी हॉस्पिटल की चिकित्सकीय टीम पर अपना विश्वास बनाए रखा।

मात्र 730 ग्राम वजन वाले अत्यंत समयपूर्व शिशु का जन्म 

शिशु को स्वस्थ होने के लिए लंबे समय तक श्वसन सहायता एवं अत्यंत सावधानीपूर्वक NICU प्रबंधन की आवश्यकता पड़ी। सर्जरी के बाद शिशु लगभग 25 दिनों तक एंडोट्रेकियल मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रहा। इसके बाद अगले 35 दिनों तक नेजल/नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटरी सपोर्ट दिया गया। NICU में लंबे प्रवास के दौरान चिकित्सकीय टीम ने शिशु की श्वसन संबंधी आवश्यकताओं, पोषण, संक्रमण के जोखिम, ऑपरेशन के बाद रिकवरी, वजन बढ़ने तथा अत्यंत समयपूर्व जन्म से जुड़ी अन्य जटिलताओं की लगातार निगरानी और उपचार किया। लगातार 126 दिनों तक अस्पताल में चले चुनौतीपूर्ण उपचार के बाद शिशु ने संतोषजनक चिकित्सकीय सुधार दिखाया है और अब उसका वजन बढ़कर लगभग 1,540 ग्राम हो गया है। अब शिशु को आवश्यक चिकित्सकीय सलाह और नियमित फॉलो-अप के साथ रानी हॉस्पिटल से छुट्टी दी जा रही है। मात्र 730 ग्राम वजन वाले अत्यंत समयपूर्व जन्मे शिशु की जीवन के शुरुआती दिनों में जटिल भोजन नली की सर्जरी और उसके बाद सफल दीर्घकालीन NICU प्रबंधन, उच्च स्तरीय नियोनेटल एवं पीडियाट्रिक सर्जिकल केयर तथा विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच बेहतर समन्वय के महत्व को दर्शाता है।

उन्नत बाल एवं नवजात चिकित्सा के प्रति प्रतिबद्धता

यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियनों एवं अन्य सहयोगी स्वास्थ्यकर्मियों की पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है, जो चार महीने से अधिक समय तक लगातार शिशु के उपचार और देखभाल में जुटी रही। इस पूरे संघर्ष में माता-पिता का साहस और चिकित्सकीय टीम पर उनका विश्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा। गंभीर जोखिमों के बारे में जानकारी दिए जाने के बावजूद उन्होंने उपचार जारी रखने का निर्णय लिया और रानी हॉस्पिटल की टीम पर भरोसा बनाए रखा। शिशु की सफलतापूर्वक छुट्टी रानी हॉस्पिटल की उन्नत बाल एवं नवजात चिकित्सा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अस्पताल में पीडियाट्रिक्स, नियोनेटोलॉजी एवं पीडियाट्रिक सर्जरी सहित विभिन्न विशेषज्ञताओं के 50 से अधिक डॉक्टरों की बहुविषयक टीम झारखंड एवं आसपास के राज्यों से आने वाले गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं और बच्चों के उपचार एवं जीवन रक्षा के लिए चौबीसों घंटे कार्यरत है। रानी हॉस्पिटल को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS), नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त है। वर्ष 2019 से अस्पताल में DNB/DrNB प्रशिक्षण, जिसमें DNB Paediatrics एवं DrNB Neonatology शामिल हैं, संचालित किया जा रहा है। यह अस्पताल की क्लिनिकल उत्कृष्टता, मेडिकल शिक्षा और भविष्य के बाल रोग विशेषज्ञों को तैयार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अस्पताल से प्रतिवर्ष लगभग 14 पोस्ट ग्रेजुएट प्रशिक्षु अपने संबंधित पोस्ट ग्रेजुएट प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे करते हैं, जो आगे चलकर देश की स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित विशेषज्ञ चिकित्सकों के रूप में अपना योगदान देते हैं।

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