द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
झारखंड राज्य सहयोगी शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो से हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में 15 वर्षों से कार्यरत अस्थाई कर्मियों को पेंशन देने की मांग की है। इस संबंध में संघ के प्रदेश अध्यक्ष सह झारखंड राज्य सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा के सदस्य विनोद तिवारी ने सीएम और स्पीकर के अलावा झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना के निदेशक तथा स्कूली शिक्षा सचिव को एक मांग पत्र भी सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड के सहायक अध्यापक लगभग 20 से लेकर 25 वर्ष तक विद्यालयों में सेवा दिए लेकिन सेवानिवृत होने के बाद उन्हें एक रुपए की भी सरकारी सहायता नहीं मिली। बुढ़ापे में वे सड़क पर भूखे मरने को बेबस और लाचार हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में झारखंड शिक्षा परियोजना के खाते में 10 करोड़ रूपया दिया गया था। प्रावधान बनाया गया था कि उस राशि के ब्याज से पारा शिक्षकों को सेवानिवृत होने पर सहायता दी जाएगी। इसको लेकर लगभग 8 से 10 बार परियोजना निदेशक एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ पारा शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। निर्णय हुआ की सेवानिवृत होने वाले पारा शिक्षकों एवं मरने वाले शिक्षकों की सूची बनाकर, उन्हें सहायता दी जाएगी। इसके लिए जयंत कुमार मिश्रा को प्रशासी पदाधिकारी भी नियुक्त किया गया। उन्होंने 03.03.2020 से 29.09.2023 के बीच की अवधि के ऐसे शिक्षकों को सहायता उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। दुर्भाग्य है कि अभी तक इस पर कोई पहल नहीं हुआ। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव का कहना है कि पहले उपरोक्त संवर्ग के शिक्षक 200 रुपए देकर सदस्य बनें, तब लाभ दिया जा सकेगा। संघ का कहना है कि सेवानिवृत शिक्षकों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। सदस्यता शुल्क के रूप में राशि जमा करना उनके लिए मुश्किल है। इसलिए हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में वर्षों तक सेवा करने वाले और मृत शिक्षकों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाए।
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