जीतेंद्र कुमार
14 वीं जेपीएससी की पीटी परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितता की जड़ में इस बार सीआईडी मट्ठा डाल देगी। इसके लिए सीआईडी लगातार छापेमारी कर रही है। डॉन तक पहुंच जाने की जी-जान से कोशिश कर रही है। इसके लिए सीआईडी जेपीएससी कार्यालय में घुस गयी। उसका हाथ पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एलबी खियांग्ते के गले तक भी पहुंच गयी। उप परीक्षा नियंत्रक गिरफ्तार कर ली गयी। टीडीपीएल के डायरेक्ट जेल भेज दिए गए। अभी भी सीआईडी का ताबड़-तोड़ अभियान जारी है। इससे हड़कंप मचना स्वाभाविक है। मच भी रहा है। गैंग में शामिल लोग परेशान भी हो उठे हैं। सत्ताधारी दल के भी कुछ नेता भी भयभीत हैं। कहा जा रहा है कि वे ही टीडीपीएल के साथ लायजनिंग कर रहे थे।

इसी क्रम में ब्यूरोक्रेट्स भला परेशान न हो, यह अस्वभाविक है। जेपीएससी में रहे एक साहब भी चिंतित हो उठे हैं। उनकी भी नींद गायब हो गयी है। पास के एक जिले में डीसी रहते हुए भी उन्हें इत्मीनान नहीं हो रहा है। उन्हें भी भय सता रहा है। लेकिन उन्हें अब कौन समझाए। आराम से इत्मीनान रहिए। उपहार में मिले जिले को जोतिए। वैसे भी उनकी संतुष्टि के लिए बता रहा हूं। अभय तिवारी हो या अन्य गैंगेस्टर। वे पूरी तरह इत्मीनान हैं। दंभ से परिवार और परिचितों से चिंता नहीं करने की सलाह दे रहे हैं। मात्र 15-20 दिनों के उबाल की बात बता रहे हैं। कह रहे हैं, अचानक उबाल जरूर आया है, लेकिन वह कुछ ही दिनों में शांत भी होने वाला है।

इस आत्म विश्वास का आधार भी है। वे जानते है कि बात निकलेगी को दूर तलक जाएगी। कई ब्यूरोक्रेट्स नपेंगे तो जांच की आंच सफेदपोशों तक भी पहुंचेगी। इसलिए जांच की आंच वहीं तक जाएगी जहां कोई ब्यूरोक्रेट्य या सफोदपोश उसमें जल न उठे। सीजीएल की जांच में सीआईडी अपना यह करिश्मा दिखा भी चुकी है। पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव का विधानसभा में दिये गए बयान से भी उन्हें ढाढस मिलेगा। उन्होंने कहा था-किसे फंसाना है, किसे बचाना है और किसे दबाना है, यह पहले से तय होता है। लेकिन चिंता की बात अब दूसरी है। बापू वाटिका में बैठे छात्र क्या जंतर-मंतर की तरह एक्ट करेंगे। करेंगे तो फिर क्या होगा।
