द फॉलोअप डेस्क, रांची
राज्य सरकार की पहल से अब लोगों को दाखिल ख़ारिज के मामले सुलझाने में सहूलियत मिल रही है। पहले जहां नागरिक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते थे, वहीं अब शिविरों के माध्यम से यह काम सरल हो गया है। हाल ही में रांची के कांके ब्लॉक में एक ऐसा ही शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 10 डिसमिल भूमि से नीचे के मामलों को प्राथमिकता दी गई।
रांची डीसी कांके ब्लॉक में फरियादियों की सुनीं समस्या
रांची के डीसी मंजुनाथ भजंत्री ने शनिवार को खुद कांके ब्लॉक का दौरा किया। यहां उन्होंने भूमि से जुड़े फरियादियों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को मामले का तुरंत समाधान करने के लिए दिशा-निर्देश दिए। इस शिविर में कुल 1347 मामलों में से 486 आवेदकों को दाखिल ख़ारिज प्रमाण पत्र सौंपे गए। हालांकि, 528 आवेदन रिजेक्ट भी हुए।
रांची डीसी ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में लोग 10 डिसमिल तक की भूमि घर बनाने और खेती करने के लिए खरीदते हैं। कई मामले आपसी बंटवारे और हिस्सेदारी से जुड़े होते हैं। इन मामलों में आमतौर पर कोई बड़ा विवाद या फर्जीवाड़ा नहीं होता। लेकिन कुछ सरकारी अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोग दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर हो जाते हैं।
इस पेंडेंसी को खत्म करने के लिए अब सरकार अभियान चला रही है। 10 डिसमिल तक की भूमि से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। बिना आपत्ति वाले मामलों को 30 दिन में और आपत्ति वाले मामलों को 90 दिन में निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। रांची डीसी ने कहा कि इस प्रक्रिया को सुलझाने के लिए सभी अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। शिविरों के जरिए उनकी समस्याओं का समाधान जल्दी किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को राहत मिल रही है और सरकारी कामकाजी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बनी रहती है।