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म्यूटेशन और रसीद काटने में भ्रष्टाचार पर कांग्रेस-भाजपा ने सरकार को घेरा, दीपक बिरुआ ने पारदर्शिता का आश्वासन दिया

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड विधानसभा में शुक्रवार को म्यूटेशन और लगान रसीद काटे जाने के क्रम में हो रहे कथित भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने मिलकर सरकार पर आरोप लगाया। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने सवाल उठाया कि 2022 से ऑनलाइन म्यूटेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन उससे पहले जिन लोगों ने म्यूटेशन नहीं कराया, उनके लिए सरकार क्या व्यवस्था कर रही है। इस पर विभागीय मंत्री दीपक बरवा स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।


प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी राजेश कच्छप का समर्थन करते हुए बताया कि खटियाणी जमीन का भी ऑनलाइन म्यूटेशन नहीं हो रहा है। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि म्यूटेशन के लिए रातों में 50,000 की मांग की जा रही थी। पीड़ित रैयत के परिचित तत्कालीन डीसी राहुल सिंह को फोन करने पर डीसी ने कहा कि म्यूटेशन हो जाएगा, लेकिन दो दिन बाद आवेदन रद्द कर दिया गया। बाद में किसी तरह रैयत अपना म्यूटेशन करवा पाए।


राजेश कच्छप ने यह भी कहा कि रसीद काटने के लिए 2,000 प्रति डिसमिल की मांग की जा रही है और कार्यालय में अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते। विधायक नवीन जायसवाल ने इस भ्रष्टाचार और विसंगति को दूर करने के लिए विशेष कैंप लगाने का सुझाव दिया। पक्ष और विपक्ष के विधायकों द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार के मुद्दे के बाद विभागीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि म्यूटेशन और रसीद से जुड़ी सभी अनियमितताओं को पारदर्शी ढंग से दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लिखित शिकायत मिलने पर संबंधित कार्रवाई की जाएगी।