जीतेंद्र कुमार, रांची
झारखंड प्रदेश भाजपा में डेढ़ दर्जन से अधिक नेता केवल कागजी प्रवक्ता बनते जा रहे हैं। उन्हें बोलने का अवसर नहीं प्राप्त हो रहा। इसको लेकर प्रवक्ताओं में आंतरिक असंतोष उभरने लगा है। पिछले दिनों प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल के सामने यह असंतोष उभर कर सतह पर भी आ गया, जब उनसे इसकी शिकायत की गयी। 14 अक्तूबर को प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल रांची आए थे। एक दिवसीय दौरे में उन्होंने सबसे पहले पार्टी के सांसदों, विधायकों और प्रदेश पदाधिकारियों के साथ दिन में बैठक की। फिर प्रदेश प्रभारियों के साथ अलग से भी बैठक की। इन बैठकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया। फिर उन्होंने शाम में प्रदेश प्रवक्ता, मीडिया प्रभारी व सोशल मीडिया से जुड़े नेताओं के साथ अलग से बैठक की। इस बैठक में मीडिया से जुड़े प्रदेश प्रवक्ताओं और मीडिया प्रभारियों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया। उनसे उनकी परेशानी को जानने की कोशिश की गयी। उनके सुझाव लिए गए।

हालांकि इस बैठक में अधिकतर प्रदेश प्रवक्ता चुप रहना ही बेहतर समझा। वे प्रेस कंफ्रेंस नहीं करने देने या प्रेस कंफ्रेंस करने का अवसर नहीं देने से कुंठित रहने के बाद भी मुंह नहीं खोला। लेकिन पूर्व मंत्री व प्रदेश प्रवक्ता रणधीर सिंह की पीड़ा मुंह से बाहर निकल आयी। उन्होंने साफ साफ कहा कि गंभीर व ज्वलंत विषयों पर प्रदेश अध्यक्ष या प्रतिपक्ष के नेता का बोलना उचित लगता है। लेकिन ये अब हर सामान्य विषय पर खुद मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखते हैं। प्रदेश प्रवक्ताओं को बोलने का मौका ही नहीं दिया जा रहा है। राजधानी से दूर दराज के क्षेत्रों में इसका गलत संदेश जा रहा है। जानकार सूत्रों के अनुसार गजेंद्र सिंह पटेल ने रणधीर सिंह की बात को गंभीरता से लिया। यह अलग बात है कि उस बैठक में उन्होंने अपनी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। कुछ बोलने से परहेज कर गए। लेकिन उन्होंने प्रवक्ताओं की भावना से पूरी तरह रू-ब-रू हुए।

प्रदेश भाजपा में 20 प्रवक्ता और 5 मीडिया प्रभारी
यहां मालूम हो कि झारखंड प्रदेश भाजपा के कुल 20 प्रवक्ता हैं। एक मुख्य प्रवक्ता और 19 प्रवक्ता। प्रवक्ताओं की इतनी बड़ी फौज के बाद एक प्रदेश मीडिया प्रभारी और 4 सह मीडिया प्रभारी भी हैं। इसके अलावा कुछ नेता सोशल मीडिया की अलग से जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
