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PMLA की धारा 3 के तहत CM हेमंत सोरेन पर आरोप गठन के मायने जानें

PMLA की धारा 3 के तहत CM हेमंत सोरेन पर आरोप गठन के मायने जानें

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः

Jharkhand News: रांची के बड़गाई अंचल में जमीन के अवैध हस्तांतरण को लेकर PMLA कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर धारा 3 के तहत आरोप गठित किया है। आरोप गठन के बाद अब कोर्ट में ट्रायल होगा। ट्रायल में मुख्यमंत्री और ईडी ओर से अपने अपने तर्क और तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे। अब पीएमएलए की धारा-3 क्या कहती है। क्या है इसके मायने। पीएमएलए की धारा-3 सीधे सीधे मनी लाउंड्रिंग से जुड़ा है। इस धारा का आशय है, कोई भी व्यक्ति अपराध से प्राप्त संपत्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ता है। जानते-बूझते हुए उसमें शामिल होता है। उस संपत्ति को छिपाता है। अपने पास रखता है। उस संपत्ति या धन को सही बताता है। उसे अपना वैध संपत्ति होने का दावा करता है, तो इसे मनी लाउंड्रिंग का अपराध माना जाता है।

कोर्ट में ट्रायल के दौरान अगर पीएमएलए की धारा-3 के तहत अपराध सिद्ध हो जाता है तो आरोपी को कम से कम तीन साल की सजा हो सकती है। यह सजा अधिकतम सात साल की भी हो सकती है। इसके साथ साथ अदालत आरोपी को जुर्माना भी लगा सकता है। कुछ विशेष परिस्थितिजन्य मनी लाउंड्रिंग के अपराध में सजा की अवधि 10 साल तक हो सकती है। हालांकि चार्ज फ्रेम हो जाने भर से कोई अपराधी नहीं होता। अब ट्रायल के दौरान दोनों पक्षों के तर्क और तथ्य के आधार पर अदालत अंतिम फैसला करता है।

Tags - Hemant Soren CM PMLA Court framing of charges implications