रांची
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं को विस्तार से सदन के सामने रखा। उन्होंने राज्य के समग्र विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए कहा कि झारखंड हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और 13वें स्थान से तीसरे स्थान तक पहुंच गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “हम जो कहते हैं, वही करते हैं”, यही सरकार की कार्यशैली है। सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा विस्तार हुआ है—जहां पहले 12-13 लाख लोगों को पेंशन मिलती थी, अब यह संख्या बढ़कर 36 लाख हो गई है। परित्यक्ता महिलाओं को भी पेंशन से जोड़ना सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 50 लाख महिलाओं को “मंईयां सम्मान योजना” का लाभ दिया जा रहा है और बजट में सबसे अधिक राशि इसी योजना के लिए निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली भूमिका में भी आगे आ रही हैं।
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नई योजनाओं से बदलाव का दावा
सीएम हेमंत सोरेन ने घोषणा की कि आने वाले समय में महिलाओं के लिए और भी महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की जाएंगी। “मंईयां सम्मान योजना” को मील का पत्थर बताते हुए उन्होंने “जोहार परियोजना”, “मंईयां बलवान योजना” और “मंईयां उद्यमी योजना” शुरू करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए लगातार नए कदम उठाती रहेगी।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा निवेश
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि “सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” के प्रति छात्रों में उत्साह बढ़ा है और हजारों आवेदन आ रहे हैं। इसी पहल के तहत 40 छात्र इंजीनियरिंग के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहले 80 स्कूल ऑफ एक्सीलेंस थे, अब 100 नए स्कूल और खोले जाएंगे।
सरकार ने शिक्षा के लिए कुल बजट का 12 प्रतिशत, यानी 18,800 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा और समाज को लेकर तीखी टिप्पणी भी की और कहा कि केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि पढ़ाई और ज्ञान से ही देश आगे बढ़ सकता है।
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सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी बयान
सीएम सोरेन ने आदिवासी मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि असम, मणिपुर या देश के किसी भी हिस्से में आदिवासियों की आवाज उठाना जरूरी है और झारखंड इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने सामाजिक संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि समाज में बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं और देश एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। उन्होंने लोगों से सोच-समझकर निर्णय लेने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पहली बार दावोस गई, जहां निवेश के नए अवसर प्राप्त हुए। उन्होंने भरोसा जताया कि सही नीतियों और प्रयासों के कारण सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और झारखंड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। अंत में उन्होंने कहा कि जो लोग उम्मीद छोड़ चुके थे, उनमें अब फिर से विश्वास जागा है। झारखंड न रुका है, न झुका है, बल्कि लगातार आगे बढ़ रहा है।
