बोकारो
बोकारो जिले के तेतुलिया मौजा में 100 एकड़ से अधिक वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में CID ने सोमवार को एक और बड़ी गिरफ्तारी की है। राजवीर कंस्ट्रक्शन के मालिक पुनीत अग्रवाल को हिरासत में लेते हुए CID ने इस घोटाले में कारोबारी पक्ष की भूमिका को स्पष्ट किया है।
लगातार डॉट इन में छपी खबर के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि राजवीर कंस्ट्रक्शन ने तेतुलिया मौजा की जिस जमीन पर डील की, वह वन विभाग की अधिसूचित भूमि थी। कंपनी ने इस जमीन के बदले उमायुष कंपनी को 3 करोड़ 40 लाख रुपये का भुगतान किया था। इस अवैध सौदे की कड़ियां अब तेजी से खुलती जा रही हैं।
इससे पहले शनिवार को CID ने इस केस के मुख्य साजिशकर्ताओं इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन को गिरफ्तार किया था। इन पर आरोप है कि इन्होंने मिलकर वन भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पहले अपने नाम कराई और फिर उसे अलग-अलग कंपनियों को बेच दिया। इस जमीन की वर्तमान कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है।
वन भूमि को स्टील प्लांट ने लौटाया था विभाग को
जानकारी के अनुसार, जिस जमीन की अवैध खरीद-बिक्री हुई, वह पहले बोकारो स्टील प्लांट के अधीन थी। बाद में इसे वन विभाग को लौटाया गया था। लेकिन माफियाओं ने अंचलकर्मियों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इस जमीन के फर्जी कागजात तैयार कर लिए और करोड़ों की डील कर डाली।
यह मामला उजागर होने के बाद डीजीपी अनुराग गुप्ता के निर्देश पर इसकी जांच CID को सौंपी गई थी। CID ने सेक्टर 12 थाना क्षेत्र में दर्ज मामले (कांड संख्या 32/2024) को टेकओवर कर जांच तेज कर दी है।
ईडी और सुप्रीम कोर्ट भी कर रहे हैं निगरानी
जमीन घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मामले में वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जमीन से जुड़े मूल दस्तावेजों का पूरा ब्योरा पेश करने को कहा है।
इस पूरे मामले की नींव उस वक्त पड़ी जब बोकारो वन प्रमंडल के प्रभारी वनपाल रुद्र प्रताप सिंह ने जमीन की अवैध बिक्री को लेकर प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि भू-माफियाओं और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से एक बड़ी साजिश रची गई थी, जिसके तहत वन भूमि को गैरकानूनी तरीके से बेच दिया गया।