साहिबगंज
साहिबगंज में 32,517 विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप की राशि मिलेगी। विभाग ने इसके लिए 6.77 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भुगतान के लिए स्वीकृत किया है। गौरतलब है कि समेकित जनजातीय विकास अभिकरण (ITDA), साहिबगंज के द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राप्त आवंटन से वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2024-25 के लंबित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति (कक्षा 1 से 8) की राशि के भुगतान की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। छात्रवृत्ति की राशि PFMS के माध्यम से लाभुकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
किस वर्ग में कितने बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति
गौरतलब है कि साहिबगंज में प्री मैट्रिक के 3,519 अनुसूचित जनजाति छात्र-छात्राओं के लिए कुल 70,57,500 रुपये स्वीकृत किए गये हैं। अनुसूचित जाति के 2,444 विद्यार्थियों के लिए कुल 46,30,000 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। ओबीसी श्रेणी के 26,549 विद्यार्थियों की खातिर 5,50,29,500 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस प्रकार कुल 32,512 विद्यार्थियों के लिए 6,77,17,000 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। 
अत्यंत पिछड़ा वर्ग में इन भागों में मिलेगी राशि
अत्यंत पिछड़ा वर्ग श्रेणी में लाभुकों का चरणवार विवरण इस प्रकार है कि भाग-1 में 4,904 विद्यार्थियों के लिए 73,56,000 रुपये, भाग-2 में 4,940 विद्यार्थियों के लिए 74, 10,000 रुपये, भाग-3 में 4,945 विद्यार्थियों के लिए 1,18,63,500 रुपये, भाग-4 में 4,928 विद्यार्थियों के लिए 1,23,20,000 रुपये, भाग-5 में 4,941 लाभुकों के लिए 1,23,52,500 रुपये जबकि भाग-6 में 1,891 विद्यार्थियों के लिए 47,27,500 रुपये। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लंबित मामले के भुगतान की बात करें तो एसटी का 1, ओबीसी का 4 लाभुक ऐसा है जिसे पैसा नहीं मिला। 
ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं विद्यार्थी
जिला प्रशासन ने संबंधित बैंक एवं विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्वीकृत Advice के अनुरूप सभी पात्र छात्र-छात्राओं के खातों में छात्रवृत्ति राशि का भुगतान PFMS के माध्यम से शीघ्र एवं पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जाए। जो छात्र-छात्राएं अब तक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन नहीं किया है वो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक से मिलकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
जिला प्रशासन शिक्षा को बढ़ावा देने तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को समयबद्ध छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।