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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने HEC की स्थिति पर जताई चिंता, केंद्र-राज्य सहयोग से सुधार की दी सलाह

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द फॉलोअप डेस्क
खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आज से 21 सितंबर तक आयोजित "East Tech Symposium-2025" (Defence Expo) कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एचईसी के बारे में महत्वपूर्ण बातें साझा की। उन्होंने कहा, "एचईसी सैटेलाइट तथा परमाणु कॉम्पोनेंट्स बनाने में अहम भूमिका निभाता रहा है। लेकिन एचईसी की स्थिति आज बहुत अच्छी नहीं है, यह जानकर काफी तकलीफ होती है आखिर किस वजह से इतना बड़ा उद्योग संस्थान आज उम्मीद के अनुरूप खरा नहीं उतर पा रहा है। जरूरत है कि केंद्र एवं राज्य सरकार समन्वय स्थापित कर आपसी सहयोग से उद्योग संस्थाओं को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करे ताकि उद्योग के क्षेत्र में राज्य तथा देश आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सके।"
आज से 21 सितंबर तक खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित "East Tech Symposium-2025" (Defence Expo) के उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य की सामर्थ्य और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "झारखंड संभावनाओं का प्रदेश है। यहां रक्षा सेक्टर में उपयोग होने वाले रॉ-मैटेरियल प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। झारखंड में कई बड़े-बड़े उद्योग संस्थान स्थापित हुए हैं। उद्योग के विस्तार में भी इस राज्य का देश में अलग पहचान रहा है। कई छोटे-बड़े उद्योग यहां पले-बढ़े हैं।" मुख्यमंत्री ने राज्य के रक्षा उद्योग की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि डिफेंस सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में यूरेनियम की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है, जो रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संसाधन है। इसके साथ ही उन्होंने डिफेंस सेक्टर में नए आयाम जोड़ने के लिए मिलजुलकर प्रयास करने की आवश्यकता को बताया।
कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, "डिफेंस एक्स्पो 'आत्मनिर्भर भारत' के उस संकल्प का प्रतीक है, जिसमें देश की शक्ति, सामर्थ्य और स्वाभिमान समाहित है। पूर्वी भारत में इस प्रकार की रक्षा प्रदर्शनी का आयोजन, औद्योगिक विकास, नवाचार और रक्षा उत्पादन में सहयोग की नई दिशाएँ खोलेगा।" राज्यपाल ने भारत के रक्षा क्षेत्र में निरंतर बढ़ती स्वदेशी क्षमता की भी सराहना की और बताया कि अब भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और निर्यातक देश बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा, "भारत के रक्षा उत्पाद अब कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं और रक्षा निर्यात 1,27,000 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। यह सब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदृष्टि नेतृत्व और उनके ‘मेक इन इंडिया’ के आह्वान से संभव हुआ है।"
इस महत्वपूर्ण आयोजन में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, भारतीय सशस्त्र सेना के रक्षा प्रमुख (सीडीएस) अनिल चौहान, झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी, पूर्वी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल रामचंद्र तिवारी, पूर्वी कमान एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ सूरत सिंह और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।



 

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