द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में जमीन लूट का मास्टरमाइंड छवि रंजन हर अंचल से ढाई लाख रुपये की फिक्स्ड रिश्वत लेता था। जाहिर है अंचलाधिकारी उससे कहीं ज्यादा वसूल कर अपना कट काट कर साहेब को चढ़ावा देते होंगे। यह बातें भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी कही। उन्होंने कहा कि 263 अंचलों से साढ़े 6 करोड़ से अधिक राशि तो हर महीने फिक्स्ड थी, फिर बड़े जमीनों में करोड़ों का खेल, अब कल्पना करिए कि एक अंचलाधिकारी कैसे गरीब किसानों और रैयतों से भी रिश्वत वसूल कर ऊपर तक पहुंचाता होगा? हर स्तर से वसूली करने के लिए नीचे से ऊपर तक तगड़ा नेटवर्क बनाया गया था। प्रेम प्रकाश, पूजा सिंघल, छवि रंजन, अमित जैसे कई लोग सरकार के लिए रिकवरी एजेंट के रूप काम करते रहे। अब जब एक एक करके इनके एजेंट पकडे जा रहे हैं, तो सरकार की बोलती बंद है। ये नटरवरलाल समान प्रेम की “ लूट प्रेम लीला” न जाने और कितने को जेल पंहुचवायेगा? धीरे धीरे खुलासा होगा कि ये “छवि रंजन -प्रेम प्रकाश मॉडल” पूरे झारखंड में व्याप्त है और इनकी जड़ें कितनी गहरी है।

गरीबों की शिकायतें ऊपर तक पहुंचेगी कैसे
सुदूर गांवों में त्रस्त किसान कैसे अपनी पीड़ा ऊपर तक पहुंचाएं? क्योंकि, गरीबों की शिकायतें ऊपर तक नहीं पहुंचे। इसके लिए सोरेन सरकार ने पहले ही बीजेपी सरकार के द्वारा शुरू की गई 181 सेवा को बंद करा दिया था। अब न छोटे कर्मचारियों की कोई जवाबदेही न ही अफसरों की।

आदिवासी होने की दुहाई देकर पाप को ढंकने की कोशिश
बाबूलाल ने कहा कि दारू घोटाला, अवैध पत्थर, बालू, कोयला खनन घोटाला, जमीन घोटाला, ट्रांसफ़र घोटाला, ठेका-पट्टा घोटाला हर तरीके से सोरेन सरकार ने राज्य और राज्यवासियों को लूटा है। इतना सबकुछ सामने आने के बाद भी राज्य का मुखिया अनजान बनने का ढोंग रचता है। आदिवासी होने की दुहाई देकर अपने पापों को ढंकने की कोशिश करता है। जल्द ही इनके सिंडिकेट के मास्टरमाइंड से लेकर हर स्तर के एजेंट होटवार जेल का आनंद लेंगे।
