द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग में आज दर्जनों की संख्या में रसोइयों और संयोजिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में रसोइया और संयोजिकाएं उपायुक्त कार्यालय पहुंचीं और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। उनका कहना है कि साल 2004 से राज्य के सरकारी और अल्पसंख्यक विद्यालयों में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग की गरीब महिलाएं रसोइया और संयोजिका के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं ने करीब 21 वर्षों तक विद्यालयों में सेवा दी है, लेकिन आज भी उन्हें न्यूनतम वेतन और सम्मानजनक मानदेय नहीं मिल रहा है।
झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया-संयोजिका अध्यक्ष संघ का आरोप है कि वर्तमान में रसोइयों को लगभग 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जा रहा है, जबकि संयोजिका और अध्यक्ष से बिना किसी मानदेय के ही काम लिया जा रहा है। इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए संघ ने सरकार से न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान संघ ने यह भी कहा कि राज्य के कई विद्यालयों में रसोइयों को हटाने की धमकी दी जा रही है और कुछ स्थानों पर उन्हें काम से हटा भी दिया गया है। संघ ने सभी हटाए गए कर्मियों को दोबारा काम पर रखने की मांग की है। इसके अलावा कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने की स्थिति में 10 लाख रुपये का बीमा, पेंशन योजना, पीएफ और ग्रेच्युटी लागू करने की भी मांग की गई। संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्यभर में चल रही हड़ताल को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान इटकी प्रखंड के मकुन्दा मध्य विद्यालय की विधवा रसोइया मीना देवी का मामला भी उठाया गया। संघ का कहना है कि वर्ष 2018 में हटाए जाने के बाद भी प्रशासनिक आदेश के बावजूद उन्हें अब तक काम पर नहीं रखा गया है और न ही उनका बकाया मानदेय दिया गया है। संघ ने उनके शीघ्र पुनर्नियोजन और बकाया भुगतान की मांग की है। इसे लेकर संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम वेतन समेत कई मांगों पर कार्रवाई की मांग की है।
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