द फॉलोअप डेस्क
ग्रामीण क्षेत्रों में इंडस्ट्रीयल एंड इंस्टीट्युशनल ग्रोथ के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन का फैसला किया है। इस संबंध में ग्रामीण विकास विभाग ने राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा है। इस महत्वपूर्ण संशोधन के बाद ग्रामीण इलाकों में इंडस्ट्रीयल और इंस्टीट्युशनल ग्रोथ हो सकेगा। वर्तमान में बिल्डिंग बायलॉज की शर्तें फिलहाल ग्रामीण इलाकों में उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के विकास में रोड़ा बन रहा है। इस महत्वपूर्ण संशोधन के बाद अब ग्रामीण इलाकों में 4.5 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे भी इंडस्ट्रीयल एंड इंस्टीट्युशनल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सकेगा। इसके अलावा वर्तमान में लागू बिल्डिंग बायलॉज में सेट बैक का एरिया भी पहले की तुलना में कम हो जाएगा।

यहां मालूम हो कि राज्य में तीन संस्थाएं भवन निर्माण प्लान को स्वीकृति देता है। नगर निगम क्षेत्र में नगर निगम, नगर निगम के बाहरी क्षेत्रों में आरआरडीए और अन्य डेवलपमेंट ऑथिरिटी तथा ग्रामीण इलाकों में जिला परिषद। ग्रामीण विकास विभाग ने नगर विकास विभाग द्वारा लागू बिल्डिंग बायलॉज को एडॉप्ट किया था। उसमें इंडस्ट्रीयल और इंस्टीट्युशनल बिल्डिंग का निर्माण कम से कम नौ मीटर चौड़ी सड़क के किनारे ही किए जाने का प्रावधान है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में नौ मीटर चौड़ी सड़क के बहुत ही कम होने की वजह से औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं हो पा रही थी। इसलिए नौ मीटर की जगह को 4.5 से 5 मीटर चौड़ी किए जाने प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नगर विकास विभाग द्वारा लागू बिल्डिंग बायलॉज की कुछ शर्तें जो उस समय पंचायतों में अप्लीकेवल किया गया था। उसे भी डिलीट करने का प्रस्ताव है।
