रांची
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती के अवसर पर झारखंड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो को लेखक डॉ. जमाल अहमद ने अपनी पुस्तक “बाबा-ए-झारखण्ड: शिबू सोरेन दानिश्वरों की नजर में” समर्पित की। यह पुस्तक 416 पृष्ठों की है और उर्दू भाषा में लिखी गई है। इस अवसर पर लेखक ने पुस्तक की विषयवस्तु और उसकी विशिष्टताओं के बारे में माननीय अध्यक्ष को विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. जमाल अहमद द्वारा लिखित यह पुस्तक ऐतिहासिक, वैचारिक और दस्तावेजी संकलन के रूप में सामने आई है, जिसमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन, संघर्ष और विचारों को विभिन्न विद्वानों की दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक को झारखंड की आत्मा, उसके संघर्ष और चेतना का जीवंत दस्तावेज बताया गया है।

लेखक के अनुसार, यह उर्दू भाषा में शिबू सोरेन के राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक व्यक्तित्व का पहला व्यापक और अकादमिक दस्तावेजीकरण है। पुस्तक में 105 वर्ष से लेकर 25 वर्ष तक की आयु के लेखकों के लेख शामिल हैं, जो पीढ़ियों के बीच एक समयातीत संवाद को दर्शाते हैं।
पुस्तक में विद्वानों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, राजनीतिज्ञों, समाजसेवियों और युवाओं के लेखों को शामिल किया गया है, जो झारखंड की सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विविधता को रेखांकित करते हैं। लेखक का मानना है कि यह पुस्तक केवल वर्तमान की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए झारखंड के सामाजिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर है।
