द फॉलोअप डेस्क
भाजपा नेता कुमार अमित ने बोकारो एयरपोर्ट से हवाई जहाजों के परिचालन को लेकर कई सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने बोकारो डीसी पर भी सवाल उठाया है। कुमार अमित ने कहा कि “बोकारो एयरपोर्ट से हवाई जहाजों का परिचालन शुरू होने के लिए लोगों की उत्साह उत्सुकता बढ़ रही है, लेकिन राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण निकट भविष्य में उड़ानें शुरू होने की संभावना नहीं दिख रही है। क्षेत्रीय संपर्क को आसान बनाने के उद्देश्य से केंद्र की उड़ान योजना के तहत लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एयरपोर्ट पिछले पांच वर्षों से रख-रखाव की कमी के कारण खराब हो रहा है। परिचालन के लिए आवश्यक एम्बुलेंस की खरीद अभी तक राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं की जा सकी है। जिला प्रशासन द्वारा टेंडर जारी किए जाने के बावजूद सतनपुर पहाड़ी पर लाइट लगाने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। एयरपोर्ट की बाउंड्री के चारों ओर अतिक्रमण हटाने के लिए पिछले महीने कुछ औपचारिकताएँ पूरी की गईं, लेकिन वहां फिर से अतिक्रमण बढ़ने लगा है।”

कुमार अमित ने बोकारो के वर्तमान उपायुक्त के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उपायुक्त एयरपोर्ट के परिचालन को लेकर सक्रिय दिखते हैं, लेकिन छह-सात माह के कार्यकाल में लगातार प्रयास करने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग से एम्बुलेंस की खरीद न कर पाना कई सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार, अगर उपायुक्त ने बोकारो के नागरिकों से एम्बुलेंस उपलब्ध कराने का आह्वान किया होता, तो स्थानीय लोग और सामाजिक संस्थाएं मिलकर एक महीने में ही यह व्यवस्था कर सकते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में सेल, सीसीएल, ओएनजीसी जैसी सार्वजनिक उपक्रम कंपनियों के अलावा वेदांता और डालमिया जैसी बड़ी निजी कंपनियां भी अपने करोड़ों रुपये के सीएसआर फंड के जरिए आसानी से एम्बुलेंस उपलब्ध करा सकती हैं। कुमार अमित ने उपायुक्त के बयान पर आश्चर्य जताया जिसमें उन्होंने कहा, “मैं राज्य सरकार के जिला दंडाधिकारी होने के नाते यहां आवश्यक सभी काम जल्द करवा दूंगा, भारत सरकार जब चाहे यहां से हवाई जहाज उड़ा सकती है।” कुमार अमित ने कहा कि जिला दंडाधिकारी राज्य और केंद्र सरकार दोनों के प्रतिनिधि होते हैं और उन्हें दोनों सरकारों की योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय बनाने की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान से जनता सोचने पर मजबूर हो रही है कि कहीं एयरपोर्ट राजनीति का शिकार तो नहीं हो रहा।
