रांची:
राज्य में बिजली टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव का उपभोक्ताओं और उद्योग जगत ने कड़ा विरोध किया है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) की जनसुनवाई में मौजूद उपभोक्ता संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों ने कहा कि पहले से ही बिजली महंगी है और इस बीच और अधिक दर बढ़ाकर 59 प्रतिशत करना, राज्य की अर्थव्यवस्था और उद्योगों के लिए नुकसानदायक होगा। जनसुनवाई के दौरान प्रतिनिधियों ने कहा कि मौजूदा हालात में बिजली दर बढ़ाना उचित नहीं है। पहले वितरण व्यवस्था में सुधार और तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। आयोग की ओर से चेयरमैन (सेवानिवृत्त) जस्टिस नवनीत कुमार और सदस्य विधि महेंद्र प्रसाद ने सुनवाई की। जिसका संचालन JSERC के सचिव राजेंद्र प्रसाद ने किया।

JSIA यानि (झारखंड स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) के अध्यक्ष अजय पचेरिवाल ने राजस्व और बकाया वसूली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 6700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली के लिए लंबित है, जिसमें बड़ी रकम कानूनी मामलों में फंसी हुई है। उनका कहना था कि 100 प्रतिशत बिलिंग कवरेज का दावा किया जा रहा है, लेकिन बिलिंग दक्षता अभी भी कम है। दूरस्थ क्षेत्रों में बिलिंग व्यवस्था कमजोर है, जहां प्रीपेड मीटर लगाने की जरूरत है। लघु उद्योग भारती, रांची महानगर के अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने कहा कि झारखंड में प्रति व्यक्ति आय कम है और गरीबी दर अधिक है। ऐसे में बिजली दर बढ़ने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों पर भी सीधा दबाव पड़ेगा।

एडवोकेट गर्गी श्रीवास्तव ने ऑडिट खातों का हवाला देते हुए कहा कि JBVNL द्वारा बताई गई राजस्व कमी पूरी तरह सही नहीं है। उनके अनुसार राजस्व घाटे के बजाय लगभग 1000 करोड़ रुपये का अधिशेष सामने आता है। ऐसे में टैरिफ बढ़ाने के बजाय वित्तीय प्रबंधन सुधारने की आवश्यकता है। जनसुनवाई में उपस्थित संगठनों ने स्पष्ट कहा कि वितरण हानि कंपनी की प्रशासनिक और तकनीकी अक्षमता का परिणाम है, जिसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए।