द फॉलोअप डेस्कः
पलामू के पांकी में दो पक्षों के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद विपक्ष पूरी तरह से हेमंत सरकार पर हमलावर है। विपक्ष लगातार हेमंत सोरेन सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है। आज भाजपा विधायक दल के नेता सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इसी मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सरकार पर खूब बरसे हैं। उन्होंने कहा कि माहौल को सुधारने की वजह सरकार बिना वजह ही देवघर का माहौल बिगाड़ने में लगी है। शिवरात्रि जैसे पावन त्यौहार में हर साल शिव बारात निकाली जाती है तो फिर देवघर में उसके रूट में बदलाव करने की क्या जरूरत है। यह सरकार केवल तुष्टिकरण की राजनीति करती है। कभी मां दुर्गा की मूर्ति को छोटा करने का आदेश देती है, तो कभी विधानसभा में नमाज कक्ष का आवंटन करती है। अब तक विधानसभा में नमाज कक्ष मामले पर समिति रिपोर्ट नहीं दे सकी है। कभी स्कूलों में प्रार्थना गीत बदल दिया जाता है। तो कभी पहाड़ियां युक्तियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाते हैं। लेकिन सरकार चुप्पी साधे रहती है, इन तमाम घटनाओं से सरकार की मंशा जाहिर है कि वह केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है।
यह भी पढ़ेः- पांकी में 1 हजार से अधिक पुलिस बल तैनात, शाम तक जारी हो सकती है इंटरनेट सेवा

सरकार करती है पक्षपात
देवघर में 144 धारा लगाना बेबुनियाद है। यह सरकार केवल सांप्रदायिक तनाव पैदा करना चाहती है। जानबूझकर सांप्रदायिक उन्माद फैलाकर वोट बैंक मजबूत करना चाहती है। ऐसी स्थिति में सरकार को संयम बरतना चाहिए ना की किसी के आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाना चाहिए। सरकार को संप्रदाय जाति के आधार पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। इस सरकार ने आज तक रांची हिंसा मामले में रिपोर्ट नहीं सौंपा है। पलामू में सालों से रह रहे दलित परिवारों को मस्जिद की जमीन बताकर जबरन भगा दिया गया। वह लोग अब थाने में जिंदगी गुजार रहे हैं। सरकार चाहती तो उन्हें कागज दे सकती थी लेकिन सरकार पक्षपात का रवैया अपनाती है।
हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://chat.whatsapp.com/EUEWO6nPYbgCd9cmfjHjxT

उपद्रवियों का बढ़ रहा मनोबल
हेमंत सोरेन की तुष्टिकरण वाली राजनीति के कारण ही उपद्रवियों का मनोबल बढ़ा है। पांकी में शिव बारात को लेकर तोरण द्वार बनाया जा रहा था लेकिन उपद्रवियों ने सुनियोजित तरीके से विवाद खड़ा कर दिया यह एक सोची समझी साजिश थी। सरकार की शह पर उपद्रवी इस तरह का उन्माद फैला रहे हैं। वोट बैंक के लिए संथाल का डेमग्राफी बदला जा रहा है। बांगलादेश घुसपैठिए घुसकर आदिवासी बच्चियों को अपना शिकार बना रहे हैं लेकिन सरकार चुप रहती है क्योंकि उसे तो बस वोट से मतलब है।
