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JSSC-CGL मामले में बाबूलाल मरांडी का CID जांच पर सवाल, कहा- बड़े साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश

JSSC-CGL मामले में बाबूलाल मरांडी का CID जांच पर सवाल, कहा- बड़े साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
JSSC-CGL मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने CID की जांच पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर जारी अपने पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि CID की जांच जिस तरह से सिर्फ अभ्यर्थियों और एजेंटों की गिरफ्तारी तक सीमित दिखाई दे रही है, उससे लोगों को गुमराह करने और बड़े साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश की आशंका पैदा होती है। बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के मित्र विनोद सिंह के पास CGL के एडमिट कार्ड मिले थे, लेकिन CID ने उनसे पूछताछ तक नहीं की। उन्होंने कहा कि गिरिडीह परीक्षा घोटाले का हॉटस्पॉट बनकर उभरा है और वहां से कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन अब तक वहां के झामुमो नेताओं से कोई पूछताछ नहीं हुई है।


 

कई अधिकारियों और नेताओं की भूमिका की जांच नहीं होने पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) से सवाल करते हुए कहा कि इतने बड़े घोटाले में सिर्फ अभ्यर्थी और एजेंट ही शामिल थे और एजेंट ही करोड़ों-अरबों का खेल कर गए, यह कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि छात्र कैसे विश्वास करेंगे कि केवल अभ्यर्थी और एजेंट ही दोषी हैं, जबकि पूरा तंत्र इससे अलग रहा। मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा कि लोग कह रहे हैं कि अनुराग गुप्ता मुख्यमंत्री के कथित तौर पर कई मामलों से जुड़ी जानकारी दबाए बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से CID अनुराग गुप्ता (Anurag Gupta), सुधीर गुप्ता, नीरज सिन्हा, मनोज कौशिक, प्रशांत कुमार और विनोद सिंह की भूमिका की जांच नहीं कर रही है। बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता पर कार्रवाई तो दूर, उन्हें पद पर बनाए रखने की क्या मजबूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रमण के दौरान आम लोगों की ऐसी जिज्ञासाओं से उन्हें रूबरू होना पड़ रहा है।


 

बोले- पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे जांच
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि CID की जांच पर तब तक भरोसा नहीं किया जाएगा, जब तक जांच की पहुंच केवल छोटे मोहरों तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंचती। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो जनता यही मानेगी कि जांच भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल लीपापोती तक सीमित है। बाबूलाल मरांडी के ये आरोप उनके सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामने आए हैं। पोस्ट में जिन व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, उनके संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस पोस्ट से नहीं होती है और संबंधित पक्षों का जवाब इस बयान में शामिल नहीं है।

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