रांची:
जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन की सरकार में झारखंड की बेटियां महफूज नहीं हैं। अगस्त माह में झारखंड की 2 बेटियां हैवानियत की शिकार हुई। बुधवार को ये बातें बीजेपी की राष्ट्रीय मंत्री सह रांची की मेयर डॉ. आशा लकड़ा ने कही। उन्होंने कहा कि जब रिम्स में इलाज के दौरान दुमका की बेटी अंकिता की मौत हो गई औऱ राज्य के लगभग हर जिले में अंकिता के हत्यारे को फांसी की सजा देने की मांग की गई तो राज्य सरकार की नींद खुली। सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई।

आखिरकार नींद से जागी सरकार!
आशा लकड़ा ने कहा कि जब राज्य के हर कोने से अंकिता के इलाज में लापरवाही बरतने की बात सामने आई तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 10 लाख रुपये देकर अंकिता के परिजनों का मुंह बंद करने का काम किया। यदि समय रहते इन पैसों से अंकिता का बेहतर इलाज कराया जाता तो शायद उसकी जान नहीं जाती। अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने एसिड अटैक से घायल चतरा की बेटी काजल को 26 दिनों बाद बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर एम्स भेजा है।

26 दिन तक दर्द से गुजरी पीड़िता!
पीड़िता 26 दिनों तक रिम्स में भर्ती रही। असहनीय दर्द से कराहती रही, परंतु इस बीच राज्य सरकार सत्ता बचाने में जुटी रही। सत्ताधारी दल के सभी विधायक व मंत्री विलासिता का भोग करते रहे। उन्हें इन बेटियों के दर्द का अहसास तक नहीं हुआ। क्या यही राज्य सरकार की नैतिकता है? क्या झारखंड की जनता ने आपको इसीलिए मुख्यमंत्री चुना था कि उनकी बहू, बेटियों की अस्मत लुटती रहे आप चैन से सिटी बजाते रहें ?