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कोर्ट फीस बढ़ोतरी पर आशा लकड़ा ने जताई आपत्ति, सरकार से फिर विचार का आग्रह

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रांचीः 
कोर्ट फीस में हुई वृद्धि को लेकर भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री सह रांची की मेयर डॉ आशा लकड़ा सवाल आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी स्थिति बना देना चाहती है कि भविष्य में कभी कोई आदिवासी कोर्ट तक ना जा सके। आदिवासी अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार को बस सहन करता रहे। पहले ही काफी कम संख्या में आदिवासी अदालत तक जाते  हैं। कोर्ट फीस वृद्धि होने से अब और कम लोग जाने लगेंगे। गरीब, अशिक्षित आदिवासी अदालत जाने के लिए नहीं सोच पाएगा, खासकर जमीन मामलों को लेकर। कोर्ट फीस में की गई वृद्धि के कारण सबसे अधिक जिला कोर्ट प्रभावित होगा। आदिवासी कोर्ट में अपील नहीं कर पाएंगे। बिल्डर आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। ऐसे हालात में पीड़ित आदिवासी न्याय के लिए किसके पास जाएगा। यदि कोर्ट ने संबंधित अपील को सुनवाई योग्य नहीं माना तो जमा की गई कोर्ट फीस भी यूं ही व्यर्थ हो जाएगी। इसलिए सरकार से आग्रह है कि कोर्ट फीस में कई गई वृद्धि के फैसले पर विचार किया जाए ताकि गरीब शोषित आदिवासी अपने अधिकार के लिए कोर्ट तक जाने की हिम्मत कर सके।  


गरीबों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला है
आशा लकड़ा ने कहा है कि झारखंड सरकार ने कोर्ट फीस अधिनियम-2021 में संशोधन कर स्टाम्प फीस में छह से लेकर दस गुना तक की वृद्धि की गई है। यह विधेयक गरीबों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला और न्याय में बाधक है। इससे गरीब आदिवासी न्याय से दूर हो जाएंगे। झारखंड में पिछले 13 वर्षों में (2009 से 2021) तक गैर कानूनी गतिविधियां अधिनियम की धाराओं के तहत 704 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें 52.3 प्रतिशत केस आदिवासियों पर दर्ज किए गए हैं, जबकि इसके मुकाबले 23.1 प्रतिशत ओबीसी और 6.7 प्रतिशत दलितों पर दर्ज हुए हैं।

 

इस तरह से हुई है वृद्धी
झारखंड सरकार ने कोर्ट फीस में 10 गुना से अधिक वृद्धि की है।
संपत्ति विवाद से संबंधित मामला फाइल करने में पहले 50 हजार रुपये लगते थे। अब अधिकतम तीन लाख रुपये तक की कोर्ट फीस लगेगी।
पहले जनहित याचिका दायर करने के लिए मात्र 250 रुपये खर्च करने पड़ते थे, अब जनहित याचिका के लिए एक हजार रुपये जमा करने  होंगे। यह पूर्व की तुलना में चार गुना अधिक है।
कोर्ट फीस (झारखंड संशोधन अधिनियम) को 22 दिसम्बर 2021 को विधानसभा से पारित कराया गया था।
 इस पर 11 फरवरी 2022 को राज्यपाल से स्वीकृति मिली थी
 गजट प्रकाशित होने के बाद कोर्ट फीस वृद्धि को लेकर विरोध हो रहा है। 
22 जुलाई 2022 को झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने राजभवन को आवेदन देकर कोर्ट फीस में हुई वृद्धि को वापस लेने की मांग की थी।