द फॉलोअप डेस्क
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कार्यशैली से परीक्षार्थी एक बार फिर परेशान हो उठे हैं। सहायक लोक अभियोजक (रेगुलर) और सहायक लोक अभियोजक (बैकलॉग) परीक्षा की संभावित तिथि की घोषणा कर जेपीएससी कान में तेल डाल कर सो गया है। जेपीएससी ने अपने वेबसाइट पर सहायक लोक अभियोजक (बैकलॉग) परीक्षा की संभावित तिथि 4 और 5 अक्तूर घोषित किया है। इसी तरह जेपीएससी ने सहायक लोक अभियोजक(रेगुलर) परीक्षा की संभावित तिथि 10-11 अक्तूबर घोषित कर रखा है। लेकिन अब तक जेपीएससी ने परीक्षा फॉर्म भरनेवाले छात्रों का न तो एडमिट कार्ड भेजा है और ना ही परीक्षा केंद्रों की सूचना दी है। यह भी नहीं बता रहा है कि चार और पांच अक्तूबर को होनेवाली परीक्षा की तिथि आगे बढ़ेगी। अब रांची से बाहर रहनेवाले आवेदक परेशान हैं, खास कर दूसरे राज्यों में रहनेवाले आवेदक और भी परेशान हैं। क्योंकि परीक्षा की तिथि चार अक्तूबर है और इसके आने में मात्र तीन दिन का समय है। अगर परीक्षा होगी तो बाहर से आनेवाले आवेदकों को टिकट कटाना होगा। नौकरी में हैं तो छुट्टी लेनी होगी। लेकिन जेपीएससी को आवेदकों की इस परेशानी से कोई मतलब नहीं है।

एपीपी रेगुलर के 134 एवं एपीपी बैकलॉग के 26 पदों के लिए होनी है परीक्षा
जेपीएससी ने जून 2025 में एपीपी बैकलॉग के 26 पदों के लिए विज्ञापन संख्या प्रकाशित किया था। जुलाई में इसके आवेदन करने की अंतिम तिथि थी। इसी तरह एपीपी रेगुलर के 134 पदों के लिए भी जून में ही विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। इसके लिए भी आवेदन करने की अंतिम तिथि जुलाई 2025 थी। आवेदन आमंत्रित करने के बाद जेपीएससी ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की संभावित तिथि की अपने वेबसाइट पर घोषणा की। परीक्षा की संभावित तिथि को ध्यान में रखते हुए एपीपी के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन करनेवाले परीक्षार्थी अपनी तैयारी शुरू कर दी। अब उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं मिल रही कि परीक्षा होगी भी या नहीं, होगी तो उनका परीक्षा केंद्र कहां होगा।
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हेल्प लाइन नंबर से नहीं मिलती कोई सही जानकारी
एपीपी पद के लिए आवेदन करने वाले परीक्षा के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए जेपीएससी द्वारा जारी हेल्प लाइन नंबर-9431301636 और 9431301419 पर फोन कर रहे हैं। परीक्षा के बारे में सही जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हेल्प लाइन नंबर को पहले तो कोई उठाता ही नहीं। उठाता भी है तो आवेदकों को सही जानकारी नहीं देता। इस तरह हजारों आवेदक परेशान और हलकान हैं।
