रांची
मौसीबाड़ी मल्लारकोचा खटाल से लापता 5 वर्षीय अंश और 4 वर्षीय अंशिका के मामले में 11 दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिलने से लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। सोमवार को अंश-अंशिका बचाओ संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता समिति के मुख्य संयोजक सह राजद नेता कैलाश यादव ने की।
बैठक में कल के एचईसी/धुर्वा बंद को सफल बनाने के लिए नगर परिसर, दुकानदारों, बाजार-हाट, सामाजिक संगठनों और समिति के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान समिति ने 11 सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया, जो मुख्य संयोजक की अनुपस्थिति में आवश्यक विषयों और कार्यक्रमों पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगी।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी तक अंश-अंशिका की सकुशल वापसी नहीं होती है, तो समिति एक बड़े जनआंदोलन की घोषणा करेगी। इस बीच शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक संगठनों से संपर्क कर मानवीय समर्थन जुटाने का अभियान भी चलाया जाएगा। कैलाश यादव ने कहा कि समिति प्रशासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच टीम को पूरा सहयोग देगी, लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछने और जनहित में आंदोलन करने के संवैधानिक अधिकार से किसी को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्तरों पर परिजनों के समर्थन में आवाज उठाने से लोगों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

यादव ने कहा कि 2 जनवरी से लापता बच्चों के परिजनों की मानसिक स्थिति अत्यंत गंभीर है। ऐसे में स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का मानवीय सहयोग रोकना अनुचित है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वह अपना काम पूरी ईमानदारी से करे और समिति को परिजनों का मनोबल बढ़ाने का दायित्व निभाने दे।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी इस मामले में चुप्पी तोड़ने, संवेदना व्यक्त करने और समिति व परिजनों के साथ सीधी वार्ता करने की मांग की है। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि अंश-अंशिका की सकुशल वापसी होने पर जांच में शामिल सभी पदाधिकारियों और टीमों को सम्मानित किया जाएगा।
बैठक में रंजन यादव, मिंटू पासवान, परमेश्वर सिंह, दीपक राय, बबन यादव, बीरेंद्र सिंह, गोपाल प्रसाद, अंजू राय, बजरंग महली, गौरीशंकर यादव, उषा देवी, पिंकी देवी, सीमा सिंह, रविंद्र राय, अर्जुन यादव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
