रांची:
स्वास्थ्य विभाग के अनुदान मांग पर कटौती प्रस्ताव रखते हुए बीजेपी विधायक अनंत ओझा ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था बद से बदतर है। कोरोना काल मे जब राज्य की जनता दवा और इलाज के अभाव में मर रहे थे उस समय भी स्वास्थ्य विभाग का बजट तिजोरी की ही शोभा बढ़ाता रहा है। कहा कि वर्ष 2021-22 में स्वास्थ्य विभाग का बजट 3259 करोड़ का था।

स्वास्थ्य बजट खर्च ही नहीं हुआ
अनंत ओझा ने कहा कि अब तक बजट का महज मात्र 1181 करोड़ ही खर्च हो पाया है। यानी मात्र 36 प्रतिशत राशि ही अब तक खर्च हो सका है। यह आंकड़ा उस समय का है जब कोरोना काल पिक पर था। उन्होंने कहा कि आज भी जनसंख्या के हिसाब से डॉक्टरों की संख्या राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। जहां 1 हजार की जनसंख्या पर एक डॉक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए वहां झारखंड में 6500 की जनसंख्या पर एक डॉक्टर है। जो डॉक्टर हैं वे अस्पताल की जगह निजी प्रैक्टिस में लगे रहते हैं।

केंद्रीय योजनाओं का भी बुरा हाल
केंद्रीय योजना का भी बुरा हाल है। राज्य के अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और न ही दवा। राज्य में मुख्यमंत्री आरोग्य योजना हांफ रहा है। पिछले बजट सत्र में यह घोषणा किया गया था कि राज्य में 10 ट्रामा सेंटर स्थापित करेंगे, आज तक काम भी शुरू नहीं हुआ।