द फॉलोअप डेस्क
आशिषण कुंडलना रांची चर्च में पहली महिला पुरोहित बन कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। महिला पादरी बनने की चाह में उनको रूढ़िवादी परंपरा को भी चुनौती देना पड़ा तब जाकर वो इस मुकाम तक पहुंच पाई। वर्तमान में वो एचआरडीसी में प्रोजेक्ट ऑफिसर और मिशन सुपरिटेंडेंट के रूप में अपनी सेवा दे रही हैं। इससे पहले कुंडलना साल 2000 से लेकर 2018 तक सचिव के पद पर अपना योगदान दिया है। आशिषण कंडुलना की शिक्षा-दीक्षा गोस्नर थियोलॉजिकल कॉलेज से पूरी हुई है। वर्ष 1993-1997 तक गोस्नर थियोलॉजिकल कॉलेज में अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1998-2000 में बैचलर ऑफ डिवनिटी की डिग्री पूरी की। जानकारी के मुताबिक, पादरी बनने की चाहत में उन्होंने रेलवे में लगी नौकरी को भी छोड़ दिया। कंडुलना बताती हैं कि उनको यहां तक पहुंचने में बहुत तिरस्कार झेलने पड़े हैं। वो कहती हैं कि थियोलॉजिकल की पढ़ाई के दौरान सैकड़ों पुरूषों के बीच वो अकेली महिला थीं। वो बताती हैं कि समाज में बदलाव लाने की चाहत से उन्हें पादरी बनने की प्रेरणा मिली।
