द फॉलोअप, रांची
देश के प्रतिष्ठित नेतरहाट आवासीय विद्यालय के प्राचार्य पद का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक प्राचार्य संतोष कुमार का कहना है कि नेतरहाट विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र विद्यालय का माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। वह इस विद्यालय का माहौल बिगाड़ने में नेतरहाट विद्यालय की तदर्थ समिति के सभापति बने राजकुमार और केदार नाथ का नाम भी गिनाते हैं। संतोष कुमार का कहना है कि सभापति द्वारा विद्यालय के कंप्यूटर साइंस टीचर रवि रंजन को प्रभारी प्राचार्य बनाया जाना नियमानुकूल नहीं है। सभापति ने रविरंजन को प्रभारी प्राचार्य बना दिया लेकिन उनके इस निर्णय पर तदर्थ समिति के अन्य सदस्यों की सहमति नहीं है। स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर रौशन कुमार भी यही तर्क देते हैं। मालूम हो कि द फॉलोअप ने 7 सितंबर को नेतरहाट आवासीय विद्यालय में प्राचार्य पद को लेकर जारी विवाद और झगड़े से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी।
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उसमें बताया था कि विद्यालय के प्राचार्य संतोष कुमार पर कई तरह के आरोप लगे। वह विवादों के घेरे में भी हैं । विद्यालय की व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर राजकुमार को तदर्थ समिति का सभापति बनाया गया। फिर राजकुमार द्वारा रवि रंजन को प्रभारी प्राचार्य बना दिया गया। इसके बाद रवि रंजन ने 14 अगस्त प्रभारी प्राचार्य के पद पर स्वतः योगदान दे दिया। पूर्व प्राचार्य संतोष कुमार का कहना है कि प्राचार्य पद पर किसी को नियुक्त करने की आवश्यक प्रक्रिया है। प्रक्रिया का पालन किए बगैर किसी को कैसे प्राचार्य बनाया जा सकता है। वह रवि रंजन की सीनियरिटी पर भी सवाल खड़ा करते हैं। उनका कहना है कि सीनियर नहीं जूनियर है। इतना ही नहीं पूर्ववर्ती छात्रों का एक समूह विद्यालय का माहौल बिगाड़ने के साथ साथ हाईकोर्ट को भी गुमराह कर रहा है। इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार खामोश खेल खेल रही है। इसलिए फिर हाईकोर्ट पर ही नजर टिक गयी है। हाईकोर्ट से ही अंतिम निर्णय की उम्मीद की जा रही है।
