द फॉलोअप डेस्क
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में अनियमितताएं सामने आने के बाद चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने और डेटा सुरक्षा नीति का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। भारत निर्वाचन आयोग को 29 जुलाई को सौंपी गई एक रिपोर्ट में बताया गया कि दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर पूर्व और पूर्व मेदिनीपुर जिले के मोयना इलाके में मतदाता सूची में अनधिकृत रूप से नाम शामिल किए गए थे।
जांच में सामने आया कि संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और उनके सहायक न केवल अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर पाए, बल्कि उन्होंने अपनी लॉगिन आईडी दूसरों के साथ साझा कर डेटा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन भी किया। इस पर निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रतिनिधि जन अधिनियम, 1950 की धारा 13(बी) और 13(सीसी) के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए।

दोषी पाए गए अधिकारियों—देबोत्तम दत्त चौधरी, तथागत मंडल, बिप्लब सरकार और सुदीप्त दास—को निलंबित कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही इन पर आपराधिक कदाचार के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
डेटा एंट्री ऑपरेटर पर भी गिरी गाज
सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हलदर के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। आयोग ने उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने को कहा है, क्योंकि वह मतदाता सूची की तैयारी और संशोधन के दौरान लापरवाही और डेटा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन में शामिल पाए गए। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है। आयोग ने सभी निर्देशों के पालन और जांच रिपोर्ट जल्द सौंपने का आदेश भी संबंधित अधिकारियों को दिया है।
