सितेश/हजारीबाग:
हजारीबाग में 100 करोड़ रुपये से अधिक की बेशकीमती 21 एकड़ जमीन से जुड़े कथित घोटाले ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। अब पूरे प्रकरण की पुलिस जांच होगी, जिससे जमीन कारोबार और राजस्व व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। मामला हजारीबाग के सारले मौजा की करीब 21 एकड़ जमीन से जुड़ा है। पावर ऑफ अटॉर्नी धारक राजेश मिश्रा का आरोप है कि रिकॉर्ड रूम में रखे मूल दस्तावेजों के साथ सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ की गई और करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन का रिकॉर्ड बदल दिया गया।

9 एकड़ सरकारी भूमि होने का दावा किया
राजेश मिश्रा का दावा है कि विवादित 21 एकड़ में लगभग 9 एकड़ सरकारी भूमि है, जबकि शेष 12 एकड़ का सेटलमेंट वर्ष 1928 में हुआ था। उनके अनुसार, वर्ष 2013 में दस्तावेजों में गड़बड़ी का पता चलने के बाद उन्होंने रिकॉर्ड निकलवाकर फॉरेंसिक जांच कराई। उनका कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी रिकॉर्ड के साथ व्यापक छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है।
आरोप है कि मूल दस्तावेजों में बदलाव कर जमीन का रिकॉर्ड दूसरे लोगों के नाम पर ओवरलैप किया गया, जिससे वास्तविक स्वामित्व प्रभावित हुआ।

पुलिस पूरे मामले की तह तक जायेगी
अब न्यायालय के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने की तैयारी में है। राजेश मिश्रा का दावा है कि निष्पक्ष और गहन जांच होने पर इस कथित जमीन घोटाले में कई बड़े अधिकारी, कर्मचारी और जमीन कारोबार से जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक सच्चाई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।