जीतेंद्र कुमार
दावोस के बाद दिल्ली के ताज होटल में निवेश का खाका खींच दिया गया। दावोस में एक लाख 27 हजार करोड़ के निवेश का प्रस्ताव आया था तो ताज पैलेस दिल्ली में भी 99 हजार करोड़ का एमओयू हुआ। झारखंड में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगेगा। 6 मिलियन टन का इस्पात संयंत्र लगेगा। 107 एकड़ के आईटी पार्क में एआई उड़ान भरेगा। डिजिटल क्रांति का डंका बजेगा। गरीबों के दुख दूर होंगे। घर बैठे जन्म, मृत्यु व अन्य प्रमाण पत्र बनेंगे। एआई ही हमें प्रमाण पत्र बनवाने का तरकीब बताएगा। बनवा कर मोबाइल पर भी भेज देगा। बिजली, पानी, स्वास्थ्य सबका रियल टाइम मॉनटरिंग होगी। शिकायतों का निबटारा बैठे बैठे होगा। न डीसी कार्यालय जाना होगा ना बीडीओ साहब के ऑफिस का चक्कर लगाना होगा। सचिवालय जाने की तो किसी को जरूरत ही नहीं पड़ेगी। झारखंड के आम लोगों, गरीब-गुरुबों का दुख छूमंतर में दूर होगा। आने वाले कुछ ही वर्षों में झारखंड एआई का ऐसा उड़ान भरेगा कि हम बंगलुरू को मात देंगे। विकिसत राज्यों को हम पछाड़ बैठेंगे। यहां के डिजिटल क्रांति का डंका विश्व बज उठेगा।

अब थोड़ा उड़ान भरने से पहले इंजन गरम करते हैं। झारखंड कैडर के 1978 बैच के आईएएस अधिकारी थे, आरएस शर्मा। पूरा नाम राम सेवक शर्मा था। केंद्र सरकार की एक योजना आई। सरकारी दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन होगा। एक क्लिक में कोई भी आम नागरिक सरकार द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी अपने कंप्यूटर पर प्राप्त कर लेगा। एक दो साल तक विभागों के दस्तावेजों का फोटो कॉपी कर उसे कंप्यूटर पर अपलोड करने की जद्दोजहद हुई। धीरे-धीरे इसकी स्थिति आधा तितर-आधा बटेर वाली हो गयी। फिर केंद्र की दूसरी योजना के तहत जमीनों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू हुई। आज भी अधूरी है। जन्म, मृत्यु जैसे दर्जनों प्रमाण पत्र बनवाने की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई। कंप्यूटराइजेशन का एक नया शिगुफा दिया गया। जमीन की रजिस्ट्री होगी। दस्तावेज वहीं से ऑनलाइन सीओ साहब के कंप्यूटर में चला जाएगा। बगैर आवेदन के उसका म्युटेशन हो जाएगा। किसी को कहीं दौड़ने-धूपने की कोई जरूरत नहीं होगी। टेंडर में होने वाले खेल को रोकने के लिए ऑनलाइन टेंडर की व्यवस्था की गयी। ताकि टेंडर जमा करने के क्रम में होनेवाली दादागिरी को रोका जाए। कंप्युटराइजेशन, डिजिटाइजेशन, इस तरह की न जाने कई जनोपयोगी योजनाएं प्रारंभ की गयी। सारी की सारी योजनाएं दम तोड़ रही हैं या जमींदोज हो गयीं।

हाल में विधानसभा को भी पेपरलेस करने की योजना प्रारंभ की गयी है। टुकदुम टुकदुम यह योजना अभी चल रही है। इससे पहले सचिवालय के विभागों को पेपरलेस करने की योजना शुरू हुई थी। चिग्घाड़ चिग्घाड़ कर बताया गया था कि अब न तो पेपर की बर्बादी होगी और ना ही कोई फाइल किसी टेबल पर रुकेगी। तय समय सीमा में कनीय से वरीय अधिकारी अपने कंप्यूटर पर फाइलों का निबटारा करेंगे। टिप्पणी करेंगे। आदेश देंगे। इससे सरकारी व्यवस्था में सुधार के क्षेत्र में झारखंड का नाम होगा। अब बहुत कुछ सुधार और विकास की बात नहीं करना चाहता। क्योंकि अति हो जाएगा। ज्यादा नींबू निचोड़ने से रस कड़वा हो जाएगा। लेकिन इतना बताए बगैर भी चुप नहीं रहा जाता। काश एआई के उड़ान की शुरुआत विभागीय वेबसाइटों से हो। जिस पर अद्यतन जनोपयोगी सूचना और सरकारी आदेशों की बात छोड़ दें तो वर्षों पूर्व अपलोड की गयी जानकारियां झारखंड के प्रयास को डेंट कर रहा है। अंत में बीती ताहि बिसारिए, आगे की सुधि ले...
