द फॉलोअप डेस्क
पाकुड़ जिले में रेल यात्री सुविधाओं की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और उग्र हो गया है। पत्थर की लोडिंग बंद किए जाने के बाद, अब शनिवार से रेल मार्ग के जरिए कोयले की ढुलाई पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के आह्वान पर लोटामारा रेलवे साइडिंग से कोयले का परिचालन बंद कर दिया गया है, जिससे रेलवे को पहले ही दिन भारी राजस्व की हानि उठानी पड़ी है।
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विदित हो कि पचुवाड़ा सेंट्रल कोल ब्लॉक और नॉर्थ कोल ब्लॉक से उत्खनित कोयला मुख्य रूप से पंजाब और पश्चिम बंगाल के बिजली संयंत्रों को भेजा जाता है। जेएमएम नेताओं के विरोध प्रदर्शन के कारण शनिवार से इस आपूर्ति शृंखला पर ब्रेक लग गया है।
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आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पाकुड़ और साहिबगंज के रेल यात्रियों की बुनियादी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
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गौरतलब है कि मालपहाड़ी रेलवे साइडिंग से पत्थरों की लोडिंग पिछले सात दिनों से बंद है। इसके कारण पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पत्थर की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। रेल मार्ग से माल ढुलाई बंद होने से न केवल रेलवे के खजाने पर असर पड़ रहा है, बल्कि निर्माण कार्यों और बिजली उत्पादन के लिए कच्चे माल की कमी का संकट भी गहराने लगा है।
इस पूरे मामले पर जेएमएम विधायक हेमलाल मुर्मू ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह लड़ाई सीधे तौर पर रेलवे प्रशासन के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे को पाकुड़ और साहिबगंज जिलों से माल ढुलाई के एवज में करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन इसके बावजूद हावड़ा और मालदा रेल डिवीजन यात्री सुविधाओं की अनदेखी कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव और दिल्ली-पटना के लिए सीधी ट्रेनों की मांग जायज है।
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