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सत्ता और सचिवालय का सच : चर्चा में स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी की नियुक्ति का विज्ञापन

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जीतेंद्र कुमार
क्या सरकार में आपकी पैरवी और पहुंच है। अगर है तो जरूर कोशिश कीजिए। सिर्फ और सिर्फ आपकी नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकल सकता है। जी हां, ऐसा ही हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग का यह खेल पिछले कुछ दिनों से खूब चर्चा में है। स्वास्थ्य विभाग से निकल कर यह चर्चा दूसरे विभागों में भी पसरने लगी है। नियुक्ति में तिकड़म की कहानी स्वास्थ्य विभाग से ही शुरू हुई है। पिछले दिनों विभाग के एक अधिकारी रिटायर हुए। वह पहले से लगे थे कि रिटायर होते ही फिर संविदा पर नियुक्त हो जाएं। विभाग में ओएसडी बन जाएं। अधिकारी ने इसके लिए पूरा हाथ-पांव मारा। लेकिन ऊपर की कृपा के बाद भी साहब को संभावना उत्साहजनक नहीं दिखी। उन्हें समझाया गया, बुझाया गया कि आज कल मुख्यमंत्री रिटायर कर्मियों को संविदा पर रखने के के विरुद्ध हैं। कई पैरवी पुत्रों को रिटायरमेंट के बाद मुख्यमंत्री ने संविदा पर रखने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।


इसके बाद रिटायर हुए साहब ने प्लान बदला। नामकुम स्थित स्वास्थ्य विभाग के कई दत्तक पुत्रों (एनआरएचएम, जेआरएचएम) जैसी संस्थाओं में घुस जाने की कोशिश की। फिर वहां से स्वास्थ्य विभाग में प्रतिनियुक्ति पर आ जाने का जुगाड़ लगाया। लेकिन उन्हें यह काफी रिस्की बताया गया। इसके बाद सिंह साहब ने तीसरा प्लान बना डाला। अपने आकाओं के बल पर नौकरी में आ जाने का जुगाड़ बना लिया है। झारखंड रुरल हेल्थ मिशन सोसाइटी ने 8 अप्रैल को एक विज्ञापन निकाला है। विज्ञापन में दो पद हैं। एक जेनरल मैनेजर ह्युमन रिसोर्स के लिए और दूसरा ऑडिटर फायनांस के लिए।  स्वास्थ्य विभाग का हर छोटा-बड़ा अधिकारी पहले से बता रहा है कि मैनेजर ह्युमन रिसोर्स का पद सिंह साहब के लिए ही है।


 इस विज्ञापन की कई विशेषताएं भी हैं। आहर्ता में रिटायर अधिकारी होना अनिवार्य है। पर दूसरी ओर रिटायर अधिकारी के आवेदन करने की अधितम उम्र सीमा की कहीं कोई चर्चा नहीं है। अर्थात 80 वर्ष का रिटायर अधिकारी भी इस पद के लिए आवेदन कर सकता है। खेल तो यह भी है कि एक-एक पद के लिए विज्ञापन निकलने पर उसमें आरक्षण का प्रावधान समाप्त हो जाता है। वह पद अनारक्षित हो जाता है। यह भी रिटायर साहब को भर्ती के लिए बेहतर गुंजाइश बनाता है। भले ही कार्मिक ने कई बार विभागों को एक-एक पद के लिए नियुक्ति का विज्ञापन नहीं निकालने का निर्देश दिया है। क्योंकि ऐसा करने पर एसटी, एससी और ओबीसी के अभ्यर्थियों का हक मारा जाता है।

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