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जंगली हाथियों के बढ़ते खतरे को लेकर गढ़वा में प्रशासन अलर्ट, राहत और बचाव पर जोर

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द फॉलोअप डेस्क
पूरे झारखंड में इन दिनों जंगली हाथियों के बढ़ते हमलों से जनजीवन प्रभावित है। गढ़वा जिला भी इससे अछूता नहीं है। राज्यभर में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, वहीं हाथियों के झुंड को भी नुकसान पहुंचा है। इसी पृष्ठभूमि में गढ़वा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जंगली हाथियों के बढ़ते प्रकोप से उत्पन्न समस्याओं के समाधान और वनाधिकार से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।
यह बैठक समाहरणालय सभागार में उपायुक्त दिनेश यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के दौरान जिले के संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में हाथी-मानव संघर्ष की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। इस क्रम में जन-धन की क्षति, फसलों और आवासों को हो रहे नुकसान के साथ-साथ इन समस्याओं के स्थायी और प्रभावी समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में हाथियों के सुरक्षित विचरण के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं, जनजागरूकता अभियानों तथा त्वरित राहत और नियंत्रण उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक का मुख्य उद्देश्य वन और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करते हुए जनहित में ठोस और व्यवहारिक निर्णय लेना रहा, ताकि भविष्य में हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके।

इस अवसर पर उपायुक्त दिनेश यादव ने कहा कि गढ़वा सहित पूरे राज्य में इन दिनों हाथियों की आवाजाही बढ़ गई है। कई मामलों में जंगली इलाकों में बिजली के संपर्क में आने से हाथियों की मौत हो रही है, वहीं हाथियों के हमले में इंसानों की जान भी जा रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। साथ ही बिजली विभाग को निर्देश दिया गया है कि जंगली क्षेत्रों में बिजली तारों की ऊंचाई बढ़ाई जाए, ताकि हाथियों को नुकसान न पहुंचे। वन विभाग को भी उन इलाकों में, जहां हाथियों का आवागमन अधिक है, लोगों को जागरूक करने और हाथियों को भगाने के लिए समुचित सामग्री की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। डीएफओ ने बताया कि हाथियों के संरक्षण और मानव जीवन की सुरक्षा को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। समिति की निगरानी में बिजली विभाग द्वारा आवश्यक कार्य किए जाएंगे, वहीं वन कर्मियों के माध्यम से लोगों के बीच हाथियों से बचाव और उन्हें सुरक्षित रूप से दूर रखने को लेकर जागरूकता फैलाई जाएगी।
इस मामले पर पलामू सांसद बीडी राम ने कहा कि यह केवल झारखंड नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है। पलामू क्षेत्र में इसकी गंभीरता को देखते हुए उन्होंने स्वयं लोकसभा में यह विषय उठाया है और कई अन्य सांसदों ने भी इस पर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर है। साथ ही पलामू लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी वन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मानव मृत्यु और घरों के नुकसान के मामलों में समय पर मुआवजा और राहत उपलब्ध कराई जाए।

 

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