डेस्क:
भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं सांसद आदित्य साहू ने आज राज्यसभा के जीरो आवर मे झारखंड मे व्याप्त सुखाड़ के मुद्दे पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। कहा कि झारखंड पहाड़ियों, पठार और जंगलों से आच्छादित राज्य है। खान खनिज के साथ प्राकृतिक सौंदर्य से भी प्रकृति ने इसे संवारा है। लगभग 3 करोड़ 40 लाख की आबादी वाले झारखंड की 76 प्रतिशत आबादी गांव में निवास करती है जिनका मुख्य पेशा कृषि उससे जुड़े पशुपालन का है।

झारखंड में भौगोलिक विविधता है
झारखंड की भौगोलिक स्थिति को यदि कहें तो इसमें विविधताएं हैं। अधिकांश क्षेत्र पठारी है। कहीं ऊंचाई 250 फीट है तो कहीं 3800 फीट तक है। साहेबगंज के क्षेत्र में गंगा का किनारा भी है। 33 प्रतिशत से अधिक जंगल के बावजूद यहां कहीं 1000मिलीमीटर तक बारिश होती है कहीं 600 तक। ऐसे औसत वर्षा झारखंड में 1200 मिलीमीटर तक वर्ष में होती है।

झारखंड में वर्षा पर निर्भर है खेती
आदित्य साहू ने कहा कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में धान की खेती होती है ,जो वर्षा पर ही आधारित है। राज्य के सिंचाई परियोजनाएं भी इसी वर्षाजल पर आधारित है। नहरों में पानी भी वर्षा जल पर ही आधारित है। विगत 4-5वर्षों से लगातार मानसून ने किसानों का साथ दिया लेकिन इस वर्ष की स्थिति काफी भयावह है। राज्य के 24 जिलों में से छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में पड़ने वाले 10-12 जिलों एवं कोल्हान के 3 जिलों में धान की रोपनी कम बारिश में भी हो जाती थी लेकिन इस वर्ष कोल्हान के 3जिलों को छोड़ दें तो 21 जिलों में सूखे का दुष्प्रभाव पड़ चुका है। किसान जो कर्ज लेकर किसी प्रकार बिचड़ा खेत मे डाल चुका था वे सुख गए।

राज्य में अब तक 51 फीसदी कम बारिश
राज्य में अब तक 51 प्रतिशत कम बारिश हुई है। किसी प्रकार से मेहनत करके अब तक किसान मात्र 22 प्रतिशत ही रोपा कर पाए है। 21 जिलों की स्थिति पूरी तरह भयावह और निराशाजनक है। अब खेती का सबसे महत्वपूर्ण महीना सावन भी आधा से अधिक बीत चुका । ऐसे में राज्य में अब तक मात्र 14प्रतिशत ही रोपाई हो सकी है। जो मानसून की स्थिति है उसमें बहुत अच्छे संकेत नही दिखाई पड़ रहे। आने वाले दिनों में न सिर्फ अनाज की जरूरत होगी बल्कि मवेशियों के लिए चारा और पीने के पानी की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी क्योंकि जलाशयों में पानी अब तक जमा नही हुआ।
सिंचाई परियोजना भी वर्षाजल पर निर्भर
राज्य के अधिकांश हिस्सों में धान की खेती होती है जो वर्षा पर ही आधारित है। राज्य की सिंचाई परियोजनाएं भी इसी वर्षाजल पर आधारित है। नहरों में पानी भी वर्षा जल पर ही आधारित है। झारखंड सरकार सूखे को लेकर गंभीर नहीं है इसलिये केंद्र सरकार झारखंड के किसानो के हित मे गंभीरता पूर्वक विचार करे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम् सांसद दीपक प्रकाश ने श्री साहू के सवाल पर असोसिएट करते हुए केंद्र सरकार से झारखंड मे सुखाड़ के विषय पर विशेष टीम भेजने का अनुरोध किया।