द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने गुरुवार को कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर फैल रही अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, “किसी भी योजना के लिए समुचित अर्थव्यवस्था मौजूद है। हम अभी भी बाजार से 18 से 20 हजार करोड़ रुपये तक का ऋण ले सकते हैं। कोई कह रहा है कि खजाना खाली है, जबकि मैं स्वयं वित्त मंत्री हूं। मुझसे पूछ लेते। राज्य का खजाना खाली नहीं है।” वित्त मंत्री ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष की मांग पर अनुपूरक बजट में विशेष चर्चा और वाद-विवाद की अवधि बढ़ाने पर सहमति बन गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों रचनात्मक भूमिका निभाते हुए सदन को शांतिपूर्ण ढंग से चलने देंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष ने भी आश्वासन दिया है।
भाजपा से नजदीकी के सवाल को किया खारिज
भाजपा से नजदीकी को लेकर उठे सवाल पर वित्त मंत्री ने कड़ा जवाब देते हुए कहा, “कुछ लोगों को दिन में सपना देखने की आदत हो गई है। माइनस-माइनस प्वाइंट तक भी ऐसी संभावना नहीं है। यह बात निकली कहां से? इस पर दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है।”
केंद्र नहीं कर रहा आर्थिक सहयोग: राधाकृष्ण किशोर
उन्होंने केंद्र सरकार पर आर्थिक सहयोग में कमी का आरोप लगाया। वित्त मंत्री ने कहा कि अगर केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि समय पर मिल जाए, तो झारखंड को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। केंद्र और कोल कंपनियों पर बकाये की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “कोल कंपनियों पर झारखंड सरकार का 1.36 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। हमने कोयला मंत्री से मुलाकात कर कहा है कि हमारी मांग की जांच के लिए या तो उनके अधिकारी यहां आएं या हमारे अधिकारी वहां जाएं, ताकि वास्तविक बकाया राशि स्पष्ट हो सके।”
