द फॉलोअप डेस्क
झारखंड शराब घोटाले की जांच में ACB की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में आज पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी से एसीबी ने लंबी पूछताछ की। गौरतलब है कि कर्ण सत्यार्थी पूर्व में राज्य के उत्पाद आयुक्त के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। पूछताछ के दौरान ACB अधिकारियों ने शराब घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली। विशेष रूप से उनका ध्यान इस बात पर केंद्रित था कि उत्पाद आयुक्त के रूप में कर्ण सत्यार्थी ने प्लेसमेंट एजेंसियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की थी। उनसे पूछा गया कि शराब घोटाले में शामिल एजेंसियों पर उन्होंने क्या कदम उठाए थे और क्या उनके द्वारा दी गई बैंक गारंटी की जांच कराई गई थी। यदि नहीं कराई गई, तो इसके पीछे क्या कारण थे इस पर भी विस्तृत जानकारी ली गई।
यह पूरा मामला राज्य में शराब बिक्री व्यवस्था से संबंधित है, जहां मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी और मार्शन इनोवेटिव नाम की दो प्लेसमेंट एजेंसियों पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। इन एजेंसियों ने विभाग को पाँच-पाँच करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी सौंपी थी। साथ ही शराब बिक्री के बाद उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि भी विभाग में जमा नहीं की गई थी।
यह पहली बार नहीं है जब इस घोटाले में किसी वरिष्ठ अधिकारी से पूछताछ हुई है। इससे पहले भी उत्पाद विभाग के कई बड़े अधिकारी जांच के घेरे में आ चुके हैं। विभाग के पूर्व सचिव विनय चौबे और अमित प्रकाश इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर हैं। इसके अलावा, उत्पाद विभाग के दो अन्य पूर्व सचिव मनोज कुमार और मुकेश कुमार, तथा पूर्व उत्पाद आयुक्त फैज अक अहमद से भी ACB पूछताछ कर चुकी है।
