द फॉलोअप डेस्क
राज्य के ऊर्जा सचिव के श्रीनिवासन को झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड तथा उर्जा विकास निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के सीएमडी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक का भी प्रभार दिए जाने के विरुद्ध झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी है। इसमें प्रार्थी अब्दुल बारी अपनी जनहित याचिका में हाईकोर्ट से ऊर्जा सचिव को ही अन्य दोनों पदों का प्रभार दिए जाने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गयी है।

याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियमावली, 1954 और मौलिक नियम 49 (एफआर-49) का स्पष्ट उल्लंघन है। ऊर्जा सचिव, जेबीवीएनएल के सीएमडी और जेबीवीएनएल के एमडी के पदों को एक साथ संभालना प्रशासनिक रूप से अव्यवहारिक है। क्योंकि एक ही व्यक्ति के किसी विभाग के अधिनस्थ दो अन्य पदों का प्रभार दिए जाने से गड़बड़ी की आशंका बढ़ गयी है। राज्य सरकार का यह फैसला केंद्रीय विद्युत अधिनियम 2003 का भी उल्लंघन है। जनहित याचिका में मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह द्वारा के श्रीनिवासन के सीआर में की गयी नकारात्मक टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है। मालूम हो कि ऊर्जा सचिव बनने से पहले के श्रीनिवासन ग्रामीण विकास सचिव थे। हालांकि पूर्व में वर्तमान मुख्य सचिव अविनाश कुमार भी तीनों ही पद पर एक साथ रह चुके हैं।
